महंगाई:विपक्ष गरम, कांग्रेस नरम

Image caption मंहगाई के मुददे पर यशवंत सिन्हा ने बहस की शुरुआत की.

लोकसभा में मंहगाई पर बहस के दौरान जहां विपक्ष कड़े तेवर में दिख रही है वहीं सरकार मान मनौव्वल का रवैया अपना रही है.

लोकसभा में मंहगाई पर नियम 184 के तहत बहस हो रही है और बहस के बाद इस मुद्दे पर मतदान भी होगा.

बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण महंगाई बढ़ रही है जबकि कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि आरोप प्रत्यारोप की बजाय संसद को मिलजुलकर काम करना चाहिए.

बीजेपी का रुख

बहस की शुरुआत करते हुए बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने तल्ख टिप्पणी की और कहा, ‘‘ जहां तक मुझे याद है 12 वीं बार महंगाई पर बहस हो रही है. इस बार 184 के तहत बहस हो रही है मतदान भी होगा लेकिन हम चाहते हैं कि सरकार ठोस क़दम उठाए ताकि मानसून सत्र के बाद जब संसद दोबारा आए तो शीतकालीन सत्र में दोबारा बहस न करनी पड़े.’’

उनका कहना था, ‘‘ अगर विकास का नाम महंगाई है तो हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए. विकास के पीछे पागलपन ठीक नहीं है. ये किसका और कैसा विकास हो रहा है.थोड़ी महंगाई के साथ विकास मंज़ूर है लेकिन अगर विकास के साथ महंगाई ज़रुरी है तो नहीं चाहिए ऐसा विकास.’’

यशवंत सिन्हा का कहना था कि अगर सरकार विपक्ष के सुझावों पर गौर करे तो महंगाई पर नियंत्रण संभव है.

पूर्व वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वो ग़लत बयान देकर महंगाई और बढ़ा रहे हैं. उनका कहना था, ‘‘ आप हर दो महीने पर बयान देते हैं कि दो महीने में महंगाई नियंत्रण में नहीं आएगी. ऐसे बयान से मुनाफाखोरों को फ़ायदा होता है. सरकार क़दम उठाए. असहाय सरकार किसी का भला नहीं कर सकती और सरकार कभी असहाय नहीं होती.’’

उन्होंने आर्थिक विषयों पर शोध करने वाली संस्था क्रिसिल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले तीन सालों में महंगाई के चलते घर के बजट में लगभग छह लाख करोड़ रुपया अधिक खर्च हुआ है.

उन्होंने कहा कि अगर महंगाई पाँच प्रतिशत पर रोकी जा सकती तो ये पैसा लोगों का खर्च नहीं होता.

बीजेपी नेता ने बताया कि एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले तीन वर्षों में खाद्यान्नों की महंगाई के चलते पाँच करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं.

यशवंत सिन्हा ने आर्थिक सर्वेक्षण का भी हवाला दिया और कहा कि आबादी में जो गरीब तबका है, उसे अपने खाद्यान्न पर आमदनी का 67 प्रतिशत हिस्सा खर्च करना पड़ता है.

आरबीआई ने 11 बार ब्याज़ दरें बढ़ाई हैं. यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री की चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री जी, बिजनेस इंडिया टाइप की पत्रिकाओं के कभी आप डार्लिंग हुआ करते थे..अब देखिए मुखपृष्ट पर आपकी तस्वीर है और शीर्षक है नौ कांफिडेंस. कैसी अर्थव्यवस्था चल रही है.’’

सरकार का बयान

सरकार का पक्ष रखते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि विपक्षी नेता ने कोई सलाह न दी बल्कि आलोचना ही करते रहे.

उनका कहना था, ‘‘हम उम्मीद कर रहे थे कि मार्गदर्शन प्राप्त होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं.’’

खुर्शीद का कहना था, ‘‘एक ऐसा पत्र लिखा गया है जिसमें कहा गया है कि हम जो चर्चा करते हैं फैसला करते हैं उसका कोई मतलब नहीं है. मैं ये कहना चाहूंगा कि हम लोग राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में फैसले करते है. मतभेद भी होते हैं. इसलिए आज जो हम चर्चा करें. निष्कर्ष निकालें उससे एक संदेश भी दें.’’

कांग्रेस नेता का कहना था कि राजनेताओं की चिंता एक जैसी है. अगर देश के लोगों पर मुद्रास्फीति का दबाव पड़ रहा है और अंकुश नहीं लग पा रहा है तो ऐसा क्यों हो रहा है. हम आरोप और प्रत्यारोप लगाएं इससे काम नहीं बनेगा.

Image caption मंहगाई पर सलमान खुर्शीद ने सरकार का पक्ष रखा.

प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए खुर्शीद ने कहा कि मनमोहन सिंह ने वो दिशा दिखाई जो कई बड़े देशों को नहीं मिल पाई. अमरीका के राष्ट्रपति कल रात तक इस प्रयास में जुटे थे कि उनकी क्रेडिबिलिटी पर दाग न लगे. ये चिंता का विषय है. पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरे में हैं.

सलमान खुर्शीद ने वैश्वीकरण का हवाला देते हुए कहा कि अब ये संभव नहीं कि हम कोई ऐसी नीति बनाएं जो दूसरे देशों पर प्रभाव न डाले.

उनका कहना था, ‘‘सब एक दूसरे से जुड़ गए हैं. विकासशील देशों में महंगाई बहुत ऊपर है. कारण भले ही अलग हों लेकिन हम जिस समस्या का सामना कर रहे हैं उस समस्या से कई लोग दो चार हो रहे है.अगर कोई ये मानता है कि विश्व की आर्थिक नीतियों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा तो ये सच्चाई को नकारने जैसी बात होगी .’’

उनका कहना था, ‘‘ हमने ये फैसला कर लिया है कि हम विश्व अर्थव्यवस्था का हिस्सा है. चीन कई सालों तक डब्ल्यूटीओ से अलग रहा. अपनी प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखने की कोशिश भी हुई है लेकिन पूरी तरह बच पाना मुश्किल है. कई निर्णय स्वीकार नहीं किए गए हैं क्योंकि हमारी अलग सोच है.त्रुटियों को दूर करने की भी कोशिश हो रही है.’’

खुर्शीद ने कई योजनाओं का हवाला दिया. मनरेगा और खाद्यान्न सुरक्षा क़ानून और सर्वशिक्षा अभियान का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि ये विकास के मॉडल का हिस्सा है.

उन्होंने आकड़े गिनाते हुए बताया कि महंगाई की दरें पिछले साल की तुलना में कम हुई है जबकि औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में विकास अच्छा हुआ है.

उनका कहना था, ‘‘ मानसून हर साल अच्छा नहीं होता. कभी कभी ख़राब भी होता है. इसका नुकसान होता है हमको.’’

उन्होंने आकड़े गिनाते हुए बताया कि महंगाई की दर पिछले साल की तुलना में 15.74 से घटकर 8.45 प्रतिशत तक आ गई है.

अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आरोप प्रत्यारोप कम करें...भारत को बेहतरीन राष्ट्र बनाएं. हर विभाग को कठघरे में खड़ा करना बंद करें. सवाल पूछना आपका कर्तव्य और दायित्व है. हमें जवाब देना है और हम देंगे. लोग आजकल कहने लगे हैं संसद फैसला नहीं करेगा लोग करेंगे. इन मुद्दों पर भी ध्यान देने की ज़रुरत है.’’

संबंधित समाचार