लोकपाल बिल आज लोक सभा में पेश किया जाएगा

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पिछले कई महीनों से विवादों में रहा लोकपाल बिल आख़िरकार गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा.

ससंदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया है कि स्पीकर को पहले ही इस बात का नोटिस दिया गया है कि बिल पेश करने के लिए दो दिन की जो सीमा होती है उसे हटा दिया जाए ताकि बिल चार अगस्त को पेश हो सके.

पवन कुमार बंसल के मुताबिक सभी पार्टियाँ बिल लाने के पक्ष में दी, इसलिए मंत्री वी नारायणस्वामी ने स्पीकर से अनुरोध किया है.

कोई भी बिल पेश करने के लिए दो दिन का समय दिया जाता है जिस दौरान बिल की प्रतियाँ बाँटी जाती हैं ताकि राजनीतिक पार्टियाँ तैयारी के साथ आ सकें. लेकिन स्पीकर अगर चाहे तो इस समयसीमा को हटा सकता है.

सरकार को उम्मीद है कि अगर संसद की स्टैंडिंग समिति अगस्त के अंत तक अपनी अनुशंसाएँ भेज देती है तो उसे पारित करवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है.

क्या है विधेयक

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सरकार के लोकपाल बिल में प्रधानमंत्री को उनके कार्यकाल के दौरान इसके दायरे से बाहर रखा गया है. लेकिन सभी भूतपूर्व प्रधानमंत्री इसके दायरे में हैं.

इस विधेयक के अनुसार लोकपाल कमिटी होगी जिसके चेयरमैन वर्तमान या रिटायर जज होंगे. इसमें आठ सदस्य होंगे जिसमें से चार अनुभव प्राप्त क़ानून को जानने वाले लोग होंगे.लोकपाल में जांच की समय सीमा सात साल रखी गई है.

लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए कुछ महीने पहले एक संयुक्त समिति बनाई गई थी जिसमें सरकार के मंत्री और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल थे.

दोनों पक्षों के बीच लंबे विचारविमर्श के बाद भी सहमति नहीं बन पाई थी, ख़ासकर प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकपाल बिल के मसौदे को पिछले महीने मंज़ूरी दे दी थी.नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे अन्ना हज़ारे ने लोकपाल विधेयक को कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद ही विधेयक की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने 16 अगस्त से आमरण अनशन करने की घोषणा कर रखी है.

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