सीएजी रिपोर्ट: राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में धांधली

राष्ट्रमंडल खेल वर्ष 2010 में तीन से 10 अक्तूबर तक राजधानी दिल्ली में आयोजित किए गए थे.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में धांधली की जानकारी सामने आई है.

ये रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी गई. उसके बाद भारत की उप-नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रेखा गुप्ता ने एक पत्रकार वार्ता में इस रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी दी.

सीएजी ने खेलों के स्टेडियम, उपकरण, खिलाड़ियों के रहने के इंतज़ाम, तकनीक के इस्तेमाल, दिल्ली के सौंदर्यीकरण, उदघाटन और समापन समारोह, इन सभी के अनुबंध में अनियमितताएं पाईं हैं.

रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के इस्तीफ़े की मांग दोहराई है.

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, “दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते, जैसा कर्नाटक में हुआ वैसे ही दिल्ली में होना चाहिए.”

दूसरी ओर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना है, "मैंने अभी तक रिपोर्ट नहीं देखी है लेकिन मैं कहना चाहती हूं कि जब ये रिपोर्ट लोक लेखा समिति के सामने पेश की जाएगी तो जिन विभागों को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया जाएगा वो वहां उपस्थित होंगे, हम भी सहयोग देंगे."

ठेकों में गड़बड़ी

लेकिन रेखा गुप्ता ने कहा, “कंपनियों को करार देने में नियमों का उल्लंघन किया गया, कंपनियों के चयन में और ठेके देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी जिससे आयोजन का ख़र्च बढ़ता गया, साथ ही कई ख़र्चे नकद में किए गए ताकि उनके बारे में जानकारी आसानी से ना बटोरी जा सके.”

उन्होंने कहा कि सरकार को खेलों के आयोजन के ख़र्च का पूरा अंदाज़ा नहीं था. आयोजन समिति ने ठेकों के आबंटन, ख़र्चों और आमदनी के रिकॉर्ड सही तरीक़े से नहीं रखे.

सीएजी के मुताबिक़ राष्ट्रमंडल खेलों से अनुमानित आमदनी क़रीब 682 करोड़ बताई गई, जबकि असल आमदनी केवल 170 करोड़ रुपए के क़रीब रही.

मैंने अभी तक रिपोर्ट नहीं देखी है लेकिन मैं कहना चाहती हूं कि जब ये रिपोर्ट लोक लेखा समिति के सामने पेश की जाएगी तो जिन विभागों को सफाई देने के लिए बुलाया जाएगा वो वहां उपस्थित होंगे, हम भी सहयोग देंगे.

शीला दीक्षित, मुख्यमंत्री, दिल्ली

747 पन्ने की इस रिपोर्ट में 33 अध्याय हैं. इस रिपोर्ट में खेलों के आयोजन का करार किए जाने के समय, मई 2003 से खेलों के ख़त्म होने के बाद दिसंबर 2010 के समय के दौरान जांच की गई है.

जांच में दिल्ली सरकार, महाराष्ट्र सरकार, छह सार्वजनिक उपक्रम समेत कुल 33 संस्थाओं का ऑडिट किया गया और इन सभी को अपना पक्ष रखने का मौक़ा दिया गया.

रेखा गुप्ता ने बताया कि खेलों की शुरुआत से पहले ही सीएजी ने स्वतंत्र तरीक़े से एक प्राथमिक जांच की थी, जिसकी जानकारी जुलाई 2009 में सरकार को दी गई थी.

इस प्राथमिक रिपोर्ट में भी खेलों के आयोजन को लेकर कई अनियमितताएं सामने आईं थी.

कलमाडी की नियुक्ति

आयोजन समिति के अध्यक्ष पद पर सुरेश कलमाडी की नियुक्ति पर उन्होंने बताया कि तत्कालीन खेल मंत्री सुनील दत्त के विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय के कहने पर ये नियुक्ति की गई.

वर्ष 2007 में तत्कालीन खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर के इस ओर ध्यान दिलाने के बावजूद कि खेल मंत्रालय को आयोजन समिति पर नियंत्रण रखने में दिक्कत आ रही है, उनकी गुहार नहीं सुनी गई.

ये समिति सरकार की अध्यक्षता में एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में बनाई जानी थी और इसका अध्यक्ष सरकार की ओर से ही नियुक्त किया जाना चाहिए था.

लेकिन ऐसा नहीं किया गया, करार की शक्ल बदल दी गई. दिसंबर 2003 में करार के नए रूप के मुताबिक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष को ही आयोजन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.