'कहां से आए संसद में लहराए गए नोट'

कैश फ़ॉर वोट (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट indian parliament
Image caption भाजपा सांसदों ने नोटों की गड्डियों को लोकसभा में लहराकर आरोप लगाया था कि सरकार ने उन्हें ये रूपए सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कैश फ़ॉर वोट मामले में दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई है. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो तीन हफ़्तों के अंदर जांच पूरी करे.

इससे पहले गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल की थी.

दिल्ली पुलिस के ज़रिए जमा किए गए रिपोर्ट पर टिप्पणि करते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस ने आधे मन से जांच की है.

अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वो इस मामले को तार्किक अंत तक ले जाए और तीन हफ़्तों के अंदर अंतिम रिपोर्ट अदालत के सामने दाख़िल करे.

अदालत ने पुलिस को ये भी निर्देश दिया कि वो इस बात का पता लगाए कि आख़िर वो पैसे कहां से आए थे जिसे भाजपा सांसदों ने संसद में दिखाए थे.

दिल्ली पुलिस इस केस में अभी तक दो लोगों सुहैल हिन्दुस्तानी और संजीव सक्सेना को गिरफ़्तार कर चुकी है जबकि समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह, समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद रेवती रमण सिंह और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अशोक अर्गल से पूछताछ किया है.

भाजपा के तीन सांसदों अशोक अर्गल, महावीर भागौरा और फग्गन सिंह कुलस्ते ने 22 जुलाई, 2008 को मनमोहन सरकार के विश्वासमत हासिल किए जाने के दौरान लोकसभा में एक करोड़ रुपए के नोटों की गड्डियां लहरा कर सनसनी फैला दी थी.

तीनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने विश्वास मत में हिस्सा नहीं लेने के बदले रुपए देने की पेशकश की थी. जबकि इन दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया था.

इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया था.

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