संविधान के दायरे में हल मुमकिन नहीं: उल्फ़ा

उल्फ़ा
Image caption उल्फ़ा के 31 साल के इतिहास में सरकार के साथ यह उसकी पहली औपचारिक शांति वार्ता है.

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन उल्फ़ा ने सरकार को अपना ‘मांगपत्र’ सौंपते हुए संविधान में फेरबदल की बात कही है.

यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) का कहना है इलाके के लोगों के अधिकारों की रक्षा और उनकी पहचान बनाए रखने के लिए जो ‘सकारात्मक क़दम’ उठाए जाने की ज़रूरत है वो संविधान के मौजूदा दायरे में मुमकिन नहीं.

शुक्रवार को उल्फ़ा के शीर्ष नेताओं ने असम में शांति बहाल करने और कई दशकों से चले आ रहे पृथकतावादी आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के साथ शांति-वार्ता की शुरुआत की.

उल्फा का कहना है कि वो असम के मूल निवासियों के अधिकारों और उनकी पहचान की रक्षा के लिए सभी तरह के संवैधानिक, राजनीतिक सुधार चाहते हैं.

मुलाकात के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उल्फ़ा के विदेश सचिव शशाधर चौधरी ने कहा कि सरकार अगर इस मसले का हल चाहती है तो उसे नियमों और क़ानून में बदलाव करना होगा क्योंकि संविधान के मौजूदा प्रारुप के तहत समस्या को हल करना संभव नहीं.

चिदंबरम ने उल्फा नेताओं से कहा कि केंद्र असम के मूल निवासियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा. उन्होंने कहा कि ‘ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जिसका हल संविधान के दायरे में न निकाला जा सके.'

इस मुलाकात के दौरान असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई भी शामिल थे.

ग़ौरतलब है कि उल्फ़ा नेता परेश बरुआ के नेतृत्व वाल उल्फ़ा का दूसरा धड़ा इस बातचीत का विरोध कर रहा है.

उल्फ़ा के 31 साल के इतिहास में सरकार के साथ यह उसकी पहली औपचारिक शांति वार्ता है.

उल्फ़ा का इतिहास

उल्फ़ा की स्थापना असम में ग़ैर कानूनी ढ़ंग से बसने वाले वालों को रोकने के लिए 1979 में हुई थी. आरोप है कि उसने कई सालों तक जबरन वसूली, अपहरण और हत्याओं का सिलसिला जारी रखा.

1992 में उसमें फूट पड़ गई और आधे से ज़्यादा लोगों ने आत्म समर्पण कर दिया था.

गत पाँच फ़रवरी को उल्फ़ा ने घोषणा की थी कि वह असम के लोगों की भावनाओं के सम्मान करते हुए केद्र से बिना शर्त बातचीत शुरू करेगी.

हालांकि संगठन का एक धड़ा बातचीत के पक्ष में अब भी नहीं है और उन्होंने पिछले दिनों अपने ही संगठन के नरमपंथी सहयोगियों और केंद्र सरकार के बीच वार्ता को भंग करने की धमकी दी थी.

उल्फ़ा के कट्टरपंथी धड़े की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था वे अपनी लड़ाई जारी रखने के प्रति दृढ़ संकल्प हैं.

उल्फ़ा के मुख्य कमांडर परेश बरुआ की अगुवाई वाले कट्टरपंथी धड़े के प्रसार सचिव अनिरुद्ध दुहोतिया ने बयान जारी कर कहा था कि असम की स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या है.

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