रेल टिकट आरक्षण में 'घोटाला'

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Image caption महालेखाकार ने आम रेलवे यात्रियों के अंदेशों की पुष्टि कर दी है

भारत के नियंत्रक और महालेखाकार ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे कर्मचारियों और दलालों का गठजोड़ तत्काल कोटे में मिलने वाली टिकटों में भारी धांधली करता है.

महालेखाकार ने भारतीय रेलवे की कंप्यूटराइज्ड तत्काल और अग्रिम आरक्षण सुविधा की जाँच करने पर पाया कि जिन आम ज़रूरतमंद यात्रियों की सुविधा के लिए यह सेवा बनी है वो इस घोटालेबाज़ी के कारण इसका पूरा लाभ नहीं ले पाते.

उल्लेखनीय है कि रेलवे की इंटरनेट आरक्षण सुविधा के ज़रिए हर दिन लाखों टिकटें बुक होती हैं.

यात्री हमेशा टिकटें न मिलने की शिकायत करते हैं जबकि रेलवे के अधिकारी कहते रहे हैं कि इंटरनेट पर आरक्षण सुविधा पारदर्शी है.

शिकायत पर मुहर

महालेखाकार ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है," जांच में पाया गया कि टिकट खिड़की खुलने के चंद ही मिनटों में तत्काल कोटे की सभी टिकटें खत्म हो जाती हैं."

भारतीय ट्रेनों में यात्रा करने वाले आम यात्री लम्बे समय से रेलवे कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत की शिकायत कर रहे हैं लेकिन यह पहली बार हुआ है कि किसी गंभीर राष्ट्रीय एजेंसी ने इस शिकायत पर मुहर लगाई है.

अपनी जांच में महालेखाकार ने पाया कि ठीक सुबह आठ बजे जब तत्काल टिकट की बुकिंग कंप्यूटर पर खुलती है तभी बुकिंग कंप्यूटर हैंग हो जाते हैं. जब तक यात्री लॉगइन करता है तब तक सभी टिकटें ख़त्म हो जाती हैं.

रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है,"चार पांच मिनट में ही तत्काल कोटे की सभी टिकटें ख़त्म हो जाती हैं."

पहले भारतीय रेल में तत्काल कोटे की टिकट का आरक्षण यात्रा का दिन छोड़ कर पांच दिन पहले शुरू होता था जो बाद में घटा कर दो दिन कर दिया गया.

तत्काल कोटे की टिकटें इंटरनेट पर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक बुक की जा सकती हैं.

अवकाश वाले दिनों में यह सुविधा केवल सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ही उपलब्ध होती है.

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