करात के निशाने पर प्रधानमंत्री और शीला

Image caption ए राजा ने दावा किया कि टू-जी मामले में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ही उन्हें स्पैक्ट्रम बेचने की मंज़ूरी दी गई थी.

यूपीए सरकार के सहयोगी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि टू-जी मामले और केजी बेसिन में गैस कॉट्रेक्ट दिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री की भूमिका पर ‘कई सवाल’ हैं.

प्रकाश करात ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आज़ादी से अब तक की 'सबसे भ्रष्ट सरकार' का नेतृत्व करने के लिए अपनी ‘ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए’.

सीपीएम की केंद्रीय समिति की दो दिवसीय बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रकाश करात ने कहा, ''मामला प्रधानमंत्री के ईमानदार या बेईमान होने का नहीं. जब आप जनता की जवाबदेही वाले किसी सर्वोच्च पद पर होते हैं तो आपको इसके लिए ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है. आपके नेतृत्व में इतना भ्रष्टाचार हो रहा है. सवाल है कि इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा.''

लोकपाल बिल के मसौदे पर अपनी राय ज़ाहिर करते हुए प्रकाश करात ने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए.

'कहानी अभी खत्म नहीं हुई है'

करात ने राष्ट्रमंडल खेलों में हुई धांधली को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के इस्तीफ़े की भी मांग की.

उन्होंने कहा कि जब तक शीला दीक्षित पूरी तरह बेगुनाह साबित नहीं हो जातीं उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह पूछे जाने पर कि क्या सीपीएम प्रधानमंत्री से इस्तीफ़े की मांग करेगी करात ने कहा कि 'कहानी अभी खत्म नहीं हुई है.'

उन्होंने कहा कि सभी मामलों में फिलहाल जांच जारी है और प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कई पक्षों के बारे में जानकारियां मिलनी बाकी हैं.

हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में धांधली की जानकारी सामने आई थी.

इस रिपोर्ट में सीएजी ने कलमाड़ी की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को ज़िम्मेदार ठहराया था.

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