प्रधानमंत्री का दोतरफ़ा बचाव

मोन्टेक सिंह आहलुवालिया
Image caption खेल मंत्री अजय माकन ने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बचाव किया है.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बचाव में कहा है कि 2जी घोटाले के लिए प्रधानमंत्री के कार्यालय को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

न्यूज़ चैनल सीएनएन-आईबीएन को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री का काम एक ‘सुपर’ मंत्री की तरह अपने सहकर्मियों की गतिविधियों पर नज़र रखना है.

ऐसा उन्होंने तब कहा जब उनसे पूछा गया कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने प्रधानमंत्री की उस सलाह का पालन किया या नहीं, जिसमें उन्होंने राजा को स्पैक्ट्रम आवंटन का काम बेहद सावधानीपूर्वक करने के लिए कहा था.

उनका कहना था कि 2 नवंबर, 2007 के दिन प्रधानमंत्री ने ए राजा को पत्र इसलिए लिखा था, क्योंकि इस मामले का सीधा संबंध आम जनता से था.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजा को लिखे पत्र में कहा था कि स्पैक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीक़े से होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री की पैरवी करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया गया था कि सभी नीतियों का पालन किया जा रहा था.

उन्होंने कहा, “ए राजा ने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया था कि वे प्रमाणित नीतियों का पालन कर रहे थे. उन्होंने प्रधानमंत्री को ये भी बताया था किसी भी तरह की चूक होने पर महाधिवक्ता से सलाह मश्वरा किया गया था.”

घोटालों की ग़ाज़

साथ ही अहलुवालिया ने कहा कि कि वे एक कैबिनेट सरकार की तरह काम नहीं करते.

उन्होंने कहा, “याद रखिये कि ऐसे माहौल में अगर किसी भी मंत्रालय से कोई ग़लती होती है, तो लोग उसका विरोध करते हैं, अदालत का दरवाज़ा खटखटाते हैं. प्रधानमंत्री के लिए ये संभव नहीं है कि वे निजी तौर पर इन सब की निगरानी रखें.”

उधर खेल मंत्री अजय माकन ने प्रधानमंत्री के बचाव में कहा है कि राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में सुरेश कलमाड़ी की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

उनका कहना है कि कलमाड़ी की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री कुछ नहीं कर सकते थे, क्योंकि उनकी नियुक्ति भारतीय ओलंपिक समिति ने की थी और एनडीए सरकार के कार्यकाल में किए गए ‘होस्ट सिटी समझौते’ का यूपीए सरकार को पालन करना ही पड़ा.

हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में धांधली की जानकारी सामने आई थी.

इस रिपोर्ट में सीएजी ने कलमाड़ी की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को ज़िम्मेदार ठहराया था.

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