जोशी की रिपोर्ट को लेकर आलोचना

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Image caption कांग्रेस ने जोशी के कदम को राजनीतिक बताया है.

कांग्रेस ने मुरली मनोहर जोशी पर लोक लेखा समिति या पीएसी में अपनी 2जी रिपोर्ट को दोबारा सदस्यों के पास भेजने पर कड़ी आलोचना की है. पार्टी ने इसे प्रायोजित और पक्षपाती कदम बताया, लेकिन भाजपा को इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आई.

कल छह अगस्त को पीएसी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने सभी सदस्यों को 2जी घोटाले पर तैयार की गई रिपोर्ट को दोबारा भेज दिया था. साथ में भेजी गई एक चिट्ठी में जोशी ने कहा था कि उन्होंने न्यायविदों से कार्यप्रणाली को लेकर बातचीत कर ली है, कानून की किताबों को देख लिया है और उन्हें लगता है कि ये पुराने पीएसी का अधूरा एजेंडा है.

गौरतलब है कि इससे पहले इसी रिपोर्ट को स्पीकर मीरा कुमार ने ये कहते हुए वापस लौटा दिया था कि इसे ज़्यादातर सदस्यों का समर्थन प्राप्त नहीं है.

इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को आड़े हाथ लिया है. उधर कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है.

कांग्रेस नेता संजय निरुपम का कहना था, "पीएसी संसद की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित कमेटी है. इस कमेटी के प्रमुख राजनीति कर रहे हैं. पीएसी की पिछली बैठक में ये फ़ैसला हुआ था कि संविधान के जानकारों की सलाह भी लेना चाहिए. लेकिन उस सलाह की कॉपी बांटने के बजाए उन्होंने वही पुरानी रिपोर्ट को सदस्यों में बाँट दिया जिसे कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए."

दरअसल पीएसी में 21 सदस्य हैं, और मंत्री बनने के कारण जयंती नटराजन के पीएसी से इस्तीफ़े के बाद कमेटी में कांग्रेस का पक्ष कमज़ोर हुआ है औऱ डर है कि इस वजह से पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है. उधर भाजपा के मुताबिक जोशी के कदम में ऐसा कुछ भी गलत नहीं है.

यानि संसद में वैसे ही दोनो पक्षों के बीच मुद्दों की कमी नहीं थी कि एक और मुद्दा टकराव का कारण बन गया है.

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