संजीव भट्ट की ज़ुबानी

गुजरात दंगा (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption गुजरात दंगों के पीड़ित नौ साल के बाद भी इन्साफ़ का इंतज़ार कर रहें हैं.

संजीव भट्ट ने अपने हलफ़नामें में कहा है कि गुजरात के अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता ने 2002 दंगों से जुड़े मामलों में अभियोजन और बचाव दोनों पक्षों के लिए हलफ़नामा तैयार किया है.

इस सिलसिले में संजीव भट्ट ने बिपिन अंबालाल पटेल के केस का उदाहरण दिया है.

बिपिन पटेल गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में एक अभियुक्त है और सुप्रीमकोर्ट के ज़रिए गठित विशेष जांच दल यानि एसआईटी ने पटेल के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल कर दिया है.

हलफ़नामें के अनुसार तुषार मेहता ने चार अप्रैल 2010 को बिपिन पटेल के वकील गौरव गोयल को एक हलफ़नामा तैयार कर भेजा जिसे गौरव गोयल को अपने मुवक्किल बिपिन पटेल के बारे में अदालत में दायर करना था.

उसी दिन शाम में तुषार मेहता ने हलफ़नामें में कुछ सुधार कर उसे दोबारा गौरव गोयल को भेजा.

तेरह फ़रवरी, 2010 को तुषार मेहता ने गुजरात सरकार के हलफ़नामें को गुरूमूर्ति के पास भेजा.

चौदह फ़रवरी , 2010 को गुरूमूर्ति ने गुजरात सरकार के हलफ़नामें में कुछ बदलाव कर उसे तुषार मेहता, अमित शाह, महेश जेठमलानी और रामजेठमलानी के पास भेजा.

पंद्रह फ़रवरी, 2010 को तुषार मेहता ने महेश जेठमलानी को तीन दस्तावेज़ भेजे जिनमें बिपिन पटेल के ज़रिए दायर की जाने वाली याचिका, गुजरात सरकार का हलफ़नामा, और बिपिन पटेल के ज़रिए दायर किया जाने वाला जवाबी हलफ़नामा शामिल था.

संजीव भट्ट के अनुसार इन तमाम ई-मेल को देखने से साफ़ पता चलता है कि तुषार मेहता, अमित शाह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जीसी मुर्मु, गुरूमूर्ति, जेठमलानी पिता-पुत्र, अभियुक्त बिपिन पटेल के वकील गौरव गोयल सभी आपस में मिलकर काम कर रहे थे.

सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि तुषार मेहता राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता होते हुए भी एक तरफ़ राज्य सरकार का हलफ़नामा तैयार कर रहें हैं और दूसरी तरफ़ उन्होंने अभियुक्त के ज़रिए दायर किए जाने वाले हलफ़नामें को भी तैयार किया.

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