पाक पायलट को शालीनता भरा जवाब

Image caption क़ैस मज़हर हुसैन ने 1965 में हुए विमान हादसे पर फ़रीदा सिंह को पत्र लिखकर संवेदना व्यक्त की थी

1965 में भारत-पाक युद्ध के बीच मारे गए भारतीय पायलट जहांगीर इंजीनियर की बेटी फ़रीदा सिंह ने पाकिस्तानी पायलट क़ैस मज़हर हुसैन के भेजे पत्र का एक शालीनता भरा जवाब भेजा है.

क़ैस मजहर के पत्र के लिए फ़रीदी सिंह ने उनका शुक्रिया अदा किया है और कहा है कि जो कुछ भी हुआ वो ‘युद्ध की अस्तव्यस्तता’ के बीच हुआ.

इस युद्ध के दौरान एक भारतीय मालवाहक विमान कच्छ के रन में भारत और पाकिस्तान की सीमा की ओर भटक गया था. क़ैस मज़हर हुसैन ने इस भारतीय विमान को मार गिराया था, जिसमें जहांगीर इंजीनियर समेत कई लोगों की मौत हो गई थी.

इस घटना के 45 साल बाद क़ैस मज़हर हुसैन ने मारे गए पायलट की बेटी फ़रीदा सिंह को एक पत्र लिख कर संवेदना व्यक्त की और कहा कि उन्हें उस हादसे पर बहुत खेद हुआ.

क़ैस ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें ये मालूम नहीं था कि उस विमान में आम लोग सवार थे और उन्होंने अपना ‘कर्तव्य’ निभाने के लिए ऐसा किया.

1965 के इस हादसे के कुछ घंटों बाद जब ऑल इंडिया रेडियो ने घोषणा की कि जिस विमान पर पाकिस्तान के पायलट ने गोली चलाई थी वो एक असैन्य विमान था, तो दोनों तरफ़ अफ़सोस का माहौल पैदा हो गया था.

‘युद्ध के मोहरे’

अपने पत्र में फ़रीदा सिंह ने लिखा, “ये सच है कि इस हादसे ने हमारे परिवार के भविष्य को हमेशा के लिए बदल दिया था. लेकिन हमने कभी भी उस इंसान के बारे में बुरी भावनी नहीं रखी, जिसने विमान की ओर अपनी बंदूक से निशाना लगाया था. सच्चाई तो ये है कि ये सब कुछ युद्ध की अस्तव्यस्तता के बीच हुआ. हम सभी युद्ध और शांति के घिनौने खेल के महज़ मोहरे हैं.”

अपने पिता को बेहद साहसी और दयालु इंसान बताते हुए फ़रीदा सिंह ने क़ैस मज़हर हुसैन को लिखे पत्र में कहा है, “क्योंकि मेरे पिता बेहद दयालु क़िस्म के थे, इसलिए आपका पत्र मिलने के बाद आपकी ओर हाथ बढ़ाने में मुझे कोई तकलीफ़ नहीं हो रही है. ये हादसा एक उदाहरण है जो ये साबित करता है कि अर्थहीन जंग अच्छे इंसानों से क्या क्या करवाती है.”

उन्होंने मज़हर हुसैन को लिखा है कि वे समझती हैं कि उनके लिए ये पत्र लिखना बेहद कठिन रहा होगा.

उन्होंने क़ैस मज़हर की हिम्मत की तारीफ़ भी की है.

पत्र में लिखा है कि उन्हें मालूम नहीं कि क़ैस मज़हर का पत्र कैसे सार्वजनिक हुआ.

हालांकि इसके बाद फ़रीदा ने ये लिखा है, “मुझे ख़ुशी है कि ये पत्र सार्वजनिक हुआ क्योंकि इससे सिर्फ़ ज़ख़्म भरेगा और कोई नुक़सान नहीं होगा. इसका लाभ व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि एक बड़े पैमाने पर होगा. अगर मेरे पिता ज़िंदा होते तो उन्हें ये देखकर अच्छा लगता कि एक पत्र से दो मुल्कों के बीच माफ़ी का सिलसिला शुरु हुआ. आख़िरकार किसी समय में ये दो मुल्क एक हुआ करते थे.”

क़ैस मज़हर हुसैन का कहना है कि वे उस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों की तलाश कर रहे हैं और उनको अगर कोई पता मिलता है तो वे उनको भी संवेदना के पत्र लिखेंगे.

संबंधित समाचार