महाराष्ट्र: पुणे फ़ायरिंग पर सरकार के इस्तीफ़े की मांग

पृथ्वीराज चव्हाण
Image caption विपक्ष ने सरकार से इस्तीफ़े की मांग की

महाराष्ट्र की विपक्ष पार्टियों ने मंगलवार को किसानों पर पुलिस फायरिंग के विरोध में राज्य के गवर्नर के शंकर नारायणन से मुलाक़ात कर कोंग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से इस्तीफा देने की मांग की है.

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान भी राज्यपाल से मिले और आश्वासन दिया की मामले की पूरी तरह से जांच की जाएगी. गुरुवार को ही इस मामले में दो पुलिस वालों को निलंबित किया गया और पुलिस ने पांच किसानों को भी गिरफ्तार किया है.

मंगलवार को पुलिस फ़ायरिंग में तीन किसानों की मौत के बाद से महाराष्ट्र विधान सभा में काम काज ठप पड़ा है. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के विधायकों की एक टीम राज्य पाल के शंकर नारायणन से मिली और राज्य सरकार को भंग करने की मांग की.

कुछ विधायकों ने ये भी आरोप लगाया की मारे जाने वाले तीन किसानों में से एक को पुलिस ने 'इनकाउंटर' में मारा था.

इस किसान के भाई ने भी मीडिया के सामने पुलिस के ख़िलाफ़ ऐसा ही इलज़ाम लगाया है, " हमारी पानी की पाइप लाइन को लेकर गाँव वालों की सभा चल रही थी उसी समय पुलिस के कुछ लोग मेरे भाई को उस मीटिंग में से खींच के बाहर लेकर गए और पुलिस वेन में डाल दिया. बाद में उसका इनकाउंटर कर दिया. हम तो अनाथ हो गए जो हमारा कमाने वाला भाई था उसके परिवार को न्याय मिलाना ही चाहिए"

आरोप बेबुनियाद

लेकिन पुलिस ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया.

पुणे ग्रामीण के एसपी संदीप कार्निक इस इलज़ाम का यूँ जवाब देते हैं, " हमारी जो गाड़ियाँ वहां खडी थीं जिसमें हमारे पुलिस के और लोग भी बैठे थे उसको गाँव के लोगों ने आग लगा दी थी, और ये कहना कि हमने उसको पकड़ के गोली मार दी गलत है क्योंकि लोग वहां पर हमारी गाड़ियों को जला रहे थे, हमने उसको नहीं मारा है."

मंगलवार को लोनावला में 400 के करीब किसान पानी की एक पाईप लाइन बिछाने के ख़िलाफ़ मुंबई-पुणे हाईवे पर विरोध कर रहे थे.

इस पाईप लाइन के ज़रिए किसानों के गाँव में एक डैम से पानी निकाल कर नज़दीक के एक शहर में सप्लाई की योजना थी.

उन्होंने सड़क पर ट्रैफिक बंद कर रखा था. पुलिस ने पहले उन्हें चेतावनी दी और बाद में प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी. जिसमें तीन किसान मारे गए.

पुलिस का कहना था की उनपर किसानों ने पथराव किया जिसके बाद मजबूरी में उन्हें गोली चलानी पड़ी.

लेकिन स्थानीय टीवी चैनलों पर जो तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, उनमें पुलिस के कुछ जवान निहत्थे और भागते हुए किसानों पर गोली चलाते देखे जा सकता है.

राज्य सरकार ने आठ पुलिस वालों को अब तक निलंबित किया है और पांच प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी भी हुई है. मामले की जांच के शुरू हो चुकी है.