कैंसर रूपी भ्रष्टाचार से निपटना ज़रूरी: राष्ट्रपति

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भारत के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने कहा है कि भ्रष्टाचार एक कैंसर है जो देश के राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन पर असर डाल रहा है और इसे समाप्त करना ज़रूरी है.

उन्होंने कहा कि संसद, सरकार, न्यायपालिका और पूरे समाज को भ्रष्टाचार पर चिंतन करना होगा और उसके ख़ात्मे के लिए दंडात्मक और सूझबबूझ वाला मिलाजुला नज़रिया अपनाना पड़ेगा.

राष्ट्रपति का ये भी कहना था कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका भारत की मज़बूत संस्थाएँ हैं लेकिन जानबूझकर या अनजाने में ऐसी कोशिश नहीं होनी चाहिए जिससे संस्था में भरोसे में कमी आए.

अपने भाषण में उन्होंने देश के विकास के लिए कृषि क्षेत्र, महिलाओं के विकास और साक्षरता में बढ़ोतरी पर भी ज़ोर दिया.

महिला विकास पर ज़ोर

कृषि के बारे में राष्ट्रपति ने कहा, “हमारी 68 फ़ीसदी जनता आज भी ग्रामीण इलाक़ों में रहती है. हमें कृषि में क्रांति के नए मॉडल की ज़रूरत है जिसमें उच्च तकनीक का इस्तेमाल शामिल है. कर्ज़, बीज, खाद और कीटनाशक मुहैया कराने वाली संस्थाओं को आपस में बेहतर तालमेल करना होगा.”

समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव पर भी प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने चिंता जताई है.

राष्ट्रपति का कहना है, “0-6 साल तक के बच्चों में लैंगिक अनुपात कम हुआ है. दहेज, बाल-विवाह और कन्या भ्रूण हत्या जैसी प्रथाओं को ख़त्म करने की कोशिश करनी होगी. महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों से भी सख़्ती से निपटने की ज़रूरत है.”

राष्ट्रपति के भाषण में 'आतंकवाद' के ख़तरे का भी ज़िक्र था. उन्होंने पिछले महीने मुंबई में हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इससे निपटने के लिए हर समय सतर्क रहना होगा.

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