'जेपी पार्क जाएँगे चाहे गिरफ़्तारी क्यों न हो जाए'

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Image caption अन्ना हज़ारे ने राजघाट पहुँचकर वहीं ध्यान लगा दिया

सरकार के लोकपाल विधेयक का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने दोहराया है कि प्रतिबंधों के बावजूद वह अनशन के लिए जयप्रकाश नारायण पार्क जाएँगे भले ही पुलिस उन्हें गिरफ़्तार क्यों न कर ले.

दिल्ली पुलिस ने हज़ारे को जेपी पार्क में अनशन करने की अनुमति देने के लिए 22 शर्तें रखी थीं मगर हज़ारे की टीम ने सारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया जिसके बाद पुलिस ने सोमवाद दोपहर वो इजाज़त वापस ले ली थी.

हज़ारे का दल सुबह से कह रहा था कि इन प्रतिबंधों के बावजूद अनशन का कार्यक्रम यथावत रहेगा और देर शाम हज़ारे ने एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी पुष्टि की.

उन्होंने कहा, "हम सुबह अनशन के लिए जेपी पार्क जाएँगे. हमें पता चला है कि वहाँ धारा 144 लगी है पर अगर हमें वहाँ जाने से मना किया तो हम उसी जगह बैठ जाएँगे कि ले चलो जहाँ चलना है."

हज़ारे का कहना था कि प्रशासन उन्हें जहाँ भी ले जाए उनका अनशन वहीं होगा, "हम जेल में अनशन पर बैठेंगे, वहाँ ले गए और अगर फिर छोड़ दिया तो वापस जेपी पार्क पर आकर बैठ जाएँगे."

उन्होंने युवाओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे भी जेल भरो आंदोलन की तैयारी करें मगर साथ ही उन्होंने सभी से अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ने की अपील भी की.

राजघाट

इधर सरकार ने अपना रुख़ कड़ा बनाते हुए कहा है कि देश का क़ानून सभी के लिए एक ही है और किसी भी विरोध प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी ज़रूरी होती है.

हज़ारे का कहना था कि जब तक उनके शरीर में जान है वह लोकपाल के लिए लड़ते रहेंगे. उन्होंने इस संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को भी घेरने की कोशिश की.

उन्होंने कहा, "मुझे लाल किले से दिए प्रधानमंत्री के आज के भाषण पर बहुत अफ़सोस हुआ. मुझे लगा कि वह काफ़ी ईमानदार व्यक्ति हैं मगर वह भी कपिल सिब्बल की भाषा बोल रहे हैं."

हज़ारे ने कहा कि प्रभावी लोकपाल के आने से वह 100 प्रतिशत भ्रष्टाचार मिटने का दावा तो नहीं करते मगर 60 से 65 प्रतिशत भ्रष्टाचार ज़रूर मिट जाएगा.

उन्होंने कहा, "अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं कपिल सिब्बल के घर पानी भरने को तैयार हूँ."

हज़ारे का कहना था कि उनके इस आंदोलन का मक़सद किसी भी तरह से सरकार गिराना नहीं है क्योंकि एक सरकार गिरेगी तो दूसरी भी वैसी ही आ जाएगी.

अचानक पहुँचे राजघाट

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Image caption प्रधानमंत्री सिंह ने लाल किले से भाषण में कहा कि भूख हड़ताल और अनशन से भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा

इससे पहले अन्ना हज़ारे दोपहर बाद अचानक राजघाट पहुँचेऔर उन्होंने वहीं पर ध्यान लगा दिया. स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर वहाँ पहुँचे लोग उनके इर्द-गिर्द इकट्ठा हो गए जबकि हज़ारे आँखें बंद किए ध्यान लगाए रहे.

ये कार्यक्रम पहले से घोषित नहीं था और पुलिस प्रशासन में इससे हल्की चिंता भी हुई और प्रशासन लगभग दो घंटे तक वहाँ से अन्ना हज़ारे के जाने का इंतज़ार करता रहा. अन्ना भारतीय समयानुसार शाम पौने सात बजे के लगभग राजघाट से संवाददाता सम्मेलन के लिए गए.

दिल्ली पुलिस ने एक तरफ़ ये कार्रवाई की तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने लाल किले की प्राचीर से दिए भाषण में कहा कि भूख हड़ताल और अनशन से भ्रष्टाचार की समस्या हल नहीं हो सकती.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ उन्होंने जेपी पार्क में विरोध-प्रदर्शन की इजाज़त इसलिए नहीं दी है क्योंकि अन्ना हज़ारे और उनके साथियों ने अनशन करने वाले लोगों की संख्या और दिनों की संख्या से जुड़ी उनकी बातें मानने से इनकार कर दिया था.

वहीं अन्ना हज़ारे की टीम ने कहा कि उन्होंने दिल्ली पुलिस की 22 शर्तों में से 16 शर्तें मानी हैं मगर बाक़ी छह शर्तें मानी नहीं जा सकती.

हज़ारे के साथी अरविंद केजरीवाल ने कहा, "हमने छह शर्तें नहीं मानी हैं क्योंकि वे असांविधानिक हैं. हम ज़रूरत होने पर कल गिरफ़्तारी भी देंगे."

हज़ारे की टीम ने जो शर्तें नहीं मानी हैं उनमें अनशन की समयावधि सिर्फ़ तीन दिनों तक सीमित रखने और प्रदर्शनकारियों की संख्या पाँच हज़ार तक करने की बात कही थी.

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