अन्ना के बचाव में उतरे रामदेव

रामदेव और अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट BBC World Service

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के भष्ट्रचार और लोकपाल के मुद्दे पर प्रस्तावित अनशन से पहले जहाँ कांग्रेस ने अन्ना पर तीखे प्रहार किए हैं वहीं स्वामी रामदेव उनके बचाव में उतरे हैं.

अन्ना हज़ारे ने सरकार के लोकपाल विधेयक के मसौदे से असंतुष्टी ज़ाहिर करते हुए 16 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन करने की घोषणा की थी. दिल्ली प्रशासन ने तीन दिन के लिए अन्ना को अनशन की अनुमति दी है और साथ ही कई और शर्ते भी रखी हैं.

रविवार को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अन्ना हज़ारे के अभियान से जुड़ीं किरण बेदी के संगठन को निशाना बनाया है. कांग्रेस प्रवक्ता मुनीष तिवारी ने तो अन्ना की अध्यक्षता वाली ट्रस्ट पर जस्टिस पीबी सावंत की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अन्ना हज़ारे को 'भ्रष्टाचार में लिप्त' करार दिया.

कांग्रेस को मिलने वाले चंदे के सवाल पर केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और अंबिका सोनी ने कहा कि हर साल कांग्रेस ही नहीं सभी पंजीकृत राजनीतिक दल अपनी आय का स्रोत और पूरा ब्योरा चुनाव आयोग को देते हैं और अन्ना हज़ारे को ये पता होना चाहिए.

अन्ना ने कहा - 'जाँच कराएँ'

उधर अन्ना हज़ारे ने मनीश तिवारी के आरोप के जवाब में कहा कि उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर यानी प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए ताकि इन आरोपों की छानबीन हो सके. उन्होंने सभी आरोपों को झूठा करार दिया.

अन्ना ने कहा, "पीबी सावंत ने कहीं नहीं लिखा कि अन्ना हज़ारे भ्रष्ट हैं. अभी भी मेरी कोशिश है कि जाँच हो. जब तक मेरे ऊपर लगे आरोपों की जाँच नहीं होती, तब तक मैं अनशन वापस नहीं लूँगा."

दूसरी ओर योग गुरु स्वामी रामदेव ने सरकार पर अन्ना हज़ारे के सत्याग्रह को दबाने का आरोप लगाया. ग़ौरतलब है कि जून के माह में दिल्ली में योग शिविर के दौरान काले धन के ख़िलाफ़ अनशन करने वाले रामदेव के सहयोगियों को दिल्ली पुलिस ने देर रात कार्रवाई कर तितर-बितर कर दिया था.

उन्होंने कहा, "जनांदोलन को दबाने की इस सरकार की कोशिशे असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और ग़ैर-ज़िम्मेदार रवैए का सूचक हैं."

रामदेव का कहना था, "चाहे वो अन्ना हज़ारे हों या फिर कोई और, जब कोई भ्रष्टाचार या काले धन की बात करता है तो सरकार कोई क़दम उठाने की जगह उसी को निशाना बनाती है और ये दुर्भाग्यपूर्ण है."

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