मैं निर्दोष हूँ: जस्टिस सेन

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Image caption जस्टिस सेन ने राज्य सभा के सामने पेश होते हुए अपना बचाव किया

कोलकाता उच्च न्यायालय के जस्टिस सौमित्र सेन ने महाभियोग पर राज्य सभा के सामने जवाब देते हुए ख़ुद पर लगे सभी आरोपों को ग़लत बताया है.

जस्टिस सौमित्र सेन के ख़िलाफ़ पैसे की हेराफेरी और तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश करने का आरोप है.

राज्य सभा के सामने दो घंटे तक न्यायमूर्ति सेन ने अपना पक्ष रखा.

उन्होंने कहा, "क़ानून के मुताबिक़ मेरे पास जो भी रास्ते थे वे सारे मैंने अपनाकर देख लिए. मैं यहाँ न्याय माँगने आया हूँ. अगर आप मुझ पर महाभियोग लगाते हैं तो ये आज तक का सबसे बड़ा अन्याय होगा. आप लोग किसी फ़ैसले से पहले सोच विचार करिएगा क्योंकि ये मेरे जीवन का फ़ैसला है."

उन्होंने कहा कि अगर उन पर महाभियोग लग भी गया तब भी वह 'छत पर खड़े होकर चिल्ला-चिल्ला कर कहेंगे कि उन्होंने पैसे की हेराफ़ेरी नहीं की है. न्यायपालिका को साफ़ करने के लिए मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है.'

उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश की छवि ख़राब करने का मतलब पूरी न्यायपालिका की छवि ख़राब करने जैसा है. न्यायमूर्ति सेन राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी के बिल्कुल सामने सदन के दरवाज़े पर खड़े थे.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने उनके विरुद्ध दो प्रस्ताव रखे.

इस प्रस्ताव का विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी समर्थन किया और सेन पर पैसे की हेराफेरी और तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश करने का मामला उठाया.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी की अगुआई में तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस सेन को 'ग़लत व्यवहार' का दोषी ठहराया था.

इस समिति का गठन विभन्न पार्टियों के 47 सदस्यों के आवेदन के बाद राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया था.

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