जस्टिस सेन को हटाने का प्रस्ताव पारित

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Image caption जस्टिस सेन ने राज्य सभा के सामने पेश होते हुए अपना बचाव किया

कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सौमित्र सेन को उनके पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव को राज्यसभा ने बहुमत से पारित कर दिया है.

प्रस्ताव के पक्ष में 189 सदस्यों ने मतदान किया जबकि 17 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया.

नियमानुसार हटाने के प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए मौजूद सदस्यों में से दो तिहाई सदस्यों की मंज़ूरी ज़रूरी थी.

अब इस प्रस्ताव को लोकसभा में पेश किया जाएगा और यदि वहाँ भी सदन में मौजूद सदस्यों में से दो तिहाई इसे पारित करते हैं तो इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद सौमित्र सेन को पद से हटा दिया जाएगा.

जस्टिस सौमित्र सेन के ख़िलाफ़ पैसे की हेराफेरी और तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश करने का आरोप है.

भारत के इतिहास में पहली बार हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश के ख़िलाफ़ ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है.

कई सबूत

सौमित्र सेन पर स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और शिपिंग अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के बीच अदालती विवाद में कोर्ट का रिसीवर रहते हुए क़रीब 33 लाख रुपए के ग़लत इस्तेमाल का आरोप है.

राज्यसभा में बुधवार को सौमित्र सेन को हटाने का प्रस्ताव सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने पेश किया. उसके बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने उस प्रस्ताव पर अपनी राय ज़ाहिर की.

Image caption अरुण जेटली ने कहा कि व्यक्ति झूठ बोल सकते हैं लेकिन चेक नहीं

प्रस्ताव पर बोलने वालों में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के अलावा राम जेठमलानी, सीपीएम की बृंदा करात, सीपीआई के डी राजा, समाजवादी पार्टी के मोहन सिंह प्रमुख थे.

सिर्फ़ बहुजन समाज पार्टी ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मत रखा.

सौमित्र सेन को हटाने के प्रस्ताव पर जेटली ने कहा कि बुधवार को उन्होंने ग़लतबयानी कर सदन को गुमराह किया है.

उन्होंने कहा कि जस्टिस सेन पर जो आरोप हैं उसके आधार पर उन्हें हटाया जाना चाहिए और उन्हें हटाने की अनुशंसा सदन को राष्ट्रपति को भेजनी चाहिए.

जेटली ने ये भी कहा कि किसी भी जज की नियुक्ति से पहले वकील के रूप में उसके रिकॉर्ड और उसके द्वारा दिए गए फ़ैसलों की जांच की जानी चाहिए.

भारत के मुख्य न्यायाधीश और राज्यसभा के सभापति ने आरोपों की जांच के लिए जो समितियां बनाई थीं उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सौमित्र सेन ने पहले वकील के रुप में रिसीवर रहते और बाद में जज के रूप में उस बैंक खाते से कई बार चेक से और नक़द पैसे निकाले जिसके वो रिसीवर थे.

अरुण जेटली ने चेक की फ़ोटोकॉपी दिखाते हुए कहा, "व्यक्ति झूठ बोल सकते हैं लेकिन चेक नहीं."

इसके बाद सीताराम येचुरी ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी मानती हैं कि न्याय प्रणाली में सुधार के लिए कड़े प्रावधान किए जाने चाहिए.

इसके बाद प्रस्ताव पर मतदान हुआ.

सौमित्र सेन से पहले नवीं लोकसभा के कार्यकाल में वर्ष 1993 में मद्रास जस्टिस रामास्वामी के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाया गया था लेकिन वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था.

इस बीच भ्रष्टाचार और ग़लत आचरण के आरोपों का सामना कर रहे सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरन के ख़िलाफ़ भी हटाने का प्रस्ताव लाया जाना था लेकिन उन्होंने इससे पहले ही पिछले महीने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

'मैं निर्दोष हूँ'

राज्यसभा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने बुधवार को जस्टिस सेन के ख़िलाफ़ प्रस्ताव रखा था.

इसके बाद राज्य सभा के सामने दो घंटे तक न्यायमूर्ति सेन ने अपना पक्ष रखा था.

उन्होंने कहा था, "क़ानून के मुताबिक़ मेरे पास जो भी रास्ते थे वे सारे मैंने अपनाकर देख लिए. मैं यहाँ न्याय माँगने आया हूँ. अगर आप मुझ पर महाभियोग लगाते हैं तो ये आज तक का सबसे बड़ा अन्याय होगा. आप लोग किसी फ़ैसले से पहले सोच विचार करिएगा क्योंकि ये मेरे जीवन का फ़ैसला है."

उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें हटाने का फ़ैसला कर लिया गया तब भी वह 'छत पर खड़े होकर चिल्ला-चिल्ला कर कहेंगे कि उन्होंने पैसे की हेराफ़ेरी नहीं की है. न्यायपालिका को साफ़ करने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है.'

उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश की छवि ख़राब करने का मतलब पूरी न्यायपालिका की छवि ख़राब करने जैसा है.

न्यायमूर्ति सेन राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी के बिल्कुल सामने सदन के दरवाज़े पर खड़े थे.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने उनके विरुद्ध दो प्रस्ताव रखे.

इस प्रस्ताव का विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी समर्थन किया और सेन पर पैसे की हेराफेरी और तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश करने का मामला उठाया.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी की अगुआई में तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस सेन को 'ग़लत व्यवहार' का दोषी ठहराया था.

इस समिति का गठन विभन्न पार्टियों के 47 सदस्यों के आवेदन के बाद राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया था.

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