विपक्ष की भूमिका पर प्रश्नचिह्न

जन लोकपाल बिल को मिल रहे जन समर्थन को देखते हुए कोई भी इसकी खुले तौर पर बुराई भी नहीं करना चाहता इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption जन लोकपाल बिल को मिल रहे जन समर्थन को देखते हुए कोई भी इसकी खुले तौर पर बुराई भी नहीं करना चाहता

विपक्ष ने अन्ना के अभियान पर सरकार के रवैए की आलोचना की है. लेकिन जन लोकपाल बिल पर विपक्ष खुलकर बात करने से बच रहा है.

विपक्ष का कहना रहा है कि हर किसी को शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन करने का हक़ है. विपक्ष का ये भी कहना है कि अन्ना हज़ारे के आंदोलन को इजाज़त देने में रुकावटें पैदा करना ग़ैर-कानूनी और असंवैधानिक है.

लेकिन ज़्यादातर विपक्षी दल खुलकर ये कहने को तैयार नहीं है कि जन लोकपाल बिल पर संसद में ही बहस हो. न ही वो उन धाराओं पर स्पष्ट तौर पर टिप्पणी कर रहे हैं जिन पर उन्हें आपत्ति है.

इसीलिए विपक्ष पर राजनीतिक अवसरवादिता के आरोप लग रहे हैं. वो सरकार की आलोचना तो कर रहा है पर अन्ना हज़ारे के जन लोकपाल बिल का पूरी तरह से समर्थन भी नहीं कर रहा है.

जन लोकपाल बिल को मिल रहे जन समर्थन को देखते हुए कोई भी इसकी खुले तौर पर आलोचना नहीं करना चाहता.

'संसदीय कार्य देखें या जन लोकपाल बिल पढ़ें?"

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संयोजक शरद यादव ने बीबीसी से कहा, "ना हम सरकारी लोकपाल से सहमत हैं और जन लोकपाल की कुछ बातों से हमारा ऐतराज़ है."

लेकिन जन लोकपाल बिल के वो कौन से बिंदु हैं जिनपर उन्हें आपत्ति है?

इस पर वो कहते हैं, "वो बताने की ज़रूरत नहीं है. हम अभी क्यों बताएँ. जब बिल के मसौदे को संसद में बहस के लिए लाया जाएगा, हम तब बताएँगे. संसद ही एक ऐसी जगह है जहाँ हम अपनी बात रखेंगे. एक-एक पत्रकार को बताकर क्या करेंगे?"

सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, "आप राजनीतिक दलों से क्यों उम्मीद रखते हैं कि वो जन लोकपाल बिल के बारे में टिप्पणी करें. ये सवाल आप मुझसे मत पूछें. ये अन्ना हज़ारे और उनकी टीम का बिल है. हमारी कोशिश है भ्रष्टाचार से लड़ना और इस पर हमारी स्वतंत्र सोच है."

समाजवादी पार्टी के शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि वो अभी तक जन लोकपाल बिल देख भी नहीं पाए हैं. जब ये बताने पर कि ये बिल कई हफ़्तों से वेबसाईट पर है, उन्होंने कहा कि 'संसद का काम देखें कि बिल पढ़ें.'

वो कहते हैं, "अभी तक जितने भी सदस्य हैं, उन्होंने बिल का मसौदा देखा नहीं है. अभी तक अन्ना हज़ारे की टीम और सरकार के कुछ गिने-चुने लोगों के बीच बातचीत हुई है. आप देख लीजिए कि पूरी जनमानस सड़कों पर है. ऐसा लोकपाल आए जो प्रभावी हो औऱ संसद की गरिमा भी रहे."

संसद को चुनौती नहीं

सभी नेता ये भी कहते हैं कि संसद को कोई भी चुनौती नहीं दे सकता. भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली भी कह चुके हैं कि वो जन लोकपाल बिल से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन कोई भी खुलकर नहीं बोलना चाहता.

वरिष्ठ पत्रकार नीना व्यास बताती हैं, "लालकृष्ण अडवाणी ने एक कार्यक्रम में खुलकर ये कह दिया कि उनका मक़सद जन लोकपाल बिल नहीं है, बल्कि ये है कि सरकार अब जाए. साथ ही भाजपा नेता ये भी कहते हैं कि वो चुनाव नहीं चाहते."

कुछ बातें जो निकलकर आई हैं वो ये कि वाम दल प्रधानमंत्री को लोकपाल बिल के दायरे से बाहर रखे जाने के विरुद्ध हैं. भाजपा की भी यही सोच है.

लोक जनपाल बिल में न्यायपालिका को भी शामिल करने की बात की गई है लेकिन कई विपक्षी दल इससे असहमत हैं.

पार्टियों में ये भी चिंता है कि लोक जनपाल के अंतर्गत लोकपाल को ज़रूरत से ज़यादा अधिकार देने की बात की गई है. हज़ारे के तरीकों को लेकर भी बहस है लेकिन कोई भी बहुत खुल कर नहीं बोलना चाहता.

संबंधित समाचार