अन्ना की 'इच्छा सूची' लंबी हुई

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Image caption अन्ना हज़ारे दिन में दो बार अपने समर्थकों को संबोधित करते हैं

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक सख़्त लोकपाल क़ानून बनाने की मांग को लेकर अनशन कर रहे गांधीवादी नेता अन्ना हज़ारे की इच्छा सूची थोडी बड़ी हो गई है.

अब वे चुनाव सुधार और किसान के हित साधने वाला भूमि अधिग्रहण क़ानून भी चाहते हैं.

अपने अनशन के पाँचवें दिन अन्ना हज़ारे के सहयोगियों ने कहा है कि वे सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई रास्ता खुला है.

हालांकि इस बीच सरकार ने संकेत दिए हैं कि 30 अगस्त तक विधेयक पारित करना संभव नहीं होगा लेकिन अन्ना हज़ारे के सहयोगी इस बात पर अड़े हुए हैं कि विधेयक मंगलवार को पेश किया जाना चाहिए.

अन्ना हज़ारे जनलोकपाल को पारित करवाने की मांग को लेकर 16 अगस्त से अनशन पर हैं. पहले वे गिरफ़्तारी के बाद तिहाड़ में अनशन करते रहे लेकिन शुक्रवार को वे रामलीला मैदान आ गए हैं.

संघर्ष न रुके

रामलीला मैदान में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा, "हमें क्यों संघर्ष करना है? सरकारी खज़ानों में रखा पैसा हमारा है. इस ख़ज़ाने को चोरों से ख़तरा नहीं है बल्कि उन लोगों से है जो इसकी रक्षा कर रहे हैं. देश को ख़तरा दुश्मनों से नहीं है बल्कि देशद्रोहियों से है."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "मैं देश के युवाओं से कहना चाहता हूँ कि ये लड़ाई लोकपाल के साथ ख़त्म नहीं होनी चाहिए. हमें अपने चुनाव प्रक्रिया की गलतियों को भी सुधारना है. इस चुनाव प्रक्रिया की ग़लतियों की वजह से ही 150 अपराधी संसद में पहुँच गए हैं."

उन्होंने भूमि सुधार की बात करते हुए कहा कि ये क़ानून बनाना चाहिए कि जब तक ग्राम सभा मंज़ूरी न दे तब तक किसानों की ज़मीन कोई न ले सके.

इस बीच अन्ना की टीम के वरिष्ठ सदस्य शांति भूषण ने कहा है कि वे जनलोकपाल विधेयक में मामूली परिवर्तनों के लिए तैयार हैं.

ये पूछे जाने पर कि 30 अगस्त की समय सीमा कुछ अव्यवहारिक नहीं है, अरविंद केजरीवाल ने कहा, "सरकार जब चाहती है तो पाँच मिनट में 15 विधेयक पारित कर लेती है. लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी विधेयक के लिए 42 साल से अधिक समय हो गया. हम जानना चाहते हैं कि इसके लिए और कितना समय चाहिए."

संसद की स्थाई समिति की ओर से लोगों की राय मंगाने पर उन्होंने कहा है कि ये लोगों और संसद दोनों के समय की बर्बादी है.

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