लोकपाल पर नरम दिखे मनमोहन

मनमोहन-अन्ना इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption मनमोहन सिंह पंद्रह अगस्त तक लोकपाल विधेयक के लिए अनशन को भी ग़लत बता रहे थे

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि लोकपाल क़ानून के मुद्दे पर आपसी समझौते की पूरी गुंजाइश है. लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि क़ानून बनाने की अपनी प्रक्रिया है जिसमें वक्त़ लगता है.

मनमोहन सिंह ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "हमारे दरवाज़े बातचीत और विमर्श के लिए हमेशा खुले हैं और हम चाहते हैं कि इस मामले में वृहद राष्ट्रीय सर्वसम्मति बने. इस मामले में आपसी समझौते की बहुत गुंजाइश है."

उन्होंने संकेतों में कहा है कि लोकपाल विधेयक को 30 अगस्त तक पारित कर पाना संभव नहीं होगा क्योंकि विधाई कार्य की एक प्रक्रिया होती है जिसमें वक़्त लगता है.

इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई एक बैठक के बाद कांग्रेस ने भी कहा है कि यदि अन्ना हज़ारे के लोग चाहें तो कांग्रेस लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है.

अन्ना हज़ारे और उनके सहयोगी सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किए गए विधेयक का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि ये विधेयक भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाला है.

इस विधेयक की जगह जनलोकपाल को संसद में पेश करके पारित करवाने की मांग को लेकर अन्ना हज़ारे 16 अगस्त से अनशन पर हैं. दिल्ली में उनकी गिरफ़्तारी के बाद इसे देश भर से व्यापक समर्थन मिल रहा है.

शुक्रवार को वामपंथियों सहित नौ विपक्षी दलों ने सरकारी लोकपाल विधेयक के विरोध में 23 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

इस दबाव के बाद सरकार और सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के रुख़ में नरमी दिख रही है.

सख़्त और प्रभावशाली लोकपाल के पक्ष में

दिल्ली में पत्रकारों से मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार एक सख़्त लोकपाल विधेयक के पक्ष में हैं.

उनका कहना है कि सरकार ने सभी दलों से राय मांगी थी लेकिन सभी का कहना था कि पहले सरकार को एक लोकपाल विधेयक पेश करना चाहिए और सभी दल बाद में अपनी राय देंगे.

उनका कहना था, "सरकार ने एक विधेयक पेश कर दिया है और हम सभी एक सख़्त और प्रभावशाली लोकपाल क़ानून के पक्ष में हैं."

उनका कहा था, "इसमें आपसी समझौते की काफ़ी गुंजाइश है और हम उम्मीद करते हैं कि हम इसमें देश के सभी विचारवान लोगो के विचारों को शामिल करके एक सख़्त और प्रभावशाली विधेयक बना सकेंगे जैसा कि समाज के सभी वर्ग चाहते हैं."

जब उनसे पूछा गया कि क्या संसद 30 अगस्त तक लोकपाल क़ानून पास करने में सफ़ल हो पाएगा जैसा कि जनलोकपाल के लिए रामलीला मैदान में अनशन कर रहे अन्ना हज़ारे ने मांग की है प्रधानमंत्री ने इसमें दिक्क़तें गिनाईं.

प्रधानमंत्री ने कहा, "विधाई कार्य की एक प्रक्रिया होती है और उसे कई स्तरों से गुज़रना होता है."

मनमोहन सिंह ने हंसते हुए कहा कि वो किसी और की कही हुई बात का खंडन नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा, "लेकिन लोगों को समझना होगा कि क़ानून बनाने की प्रक्रिया की अपनी गति है जिसमें वक्त लग सकता है."

कांग्रेस का बदला रूख़

शुक्रवार को तिहाड़ जेल से निकलने के बाद रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे अन्ना हज़ारे ने कहा है कि जन लोकपाल बिल 30 अगस्त तक पास कर दिया जाना चाहिए.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय पटल पर ला दिया है.

अन्ना हज़ारे ने कहा कि अगर क़ानून 30 अगस्त तक पास नहीं हुआ तो वो देश भर में जेल भरो आंदोलन अभियान चलाएंगे.

उन्होंने विधेयक के पारित होने तक अपना अनशन भी जारी रखने की बात कही है.

मनमोहन सिंह का ताज़ा बयान स्वतंत्रता दिवस पर लाल क़िले के प्राचीर से दिए गए उनके भाषण से बिल्कुल अलग है जिसमें उन्होंने न सिर्फ़ ये साफ़ किया था कि क़ानून बनाने का अधिकार संसद के अलावा और किसी को नहीं है, बल्कि ये भी कहा था कि इस मामले पर किया जा रहा अनशन और हड़ताल ग़लत है.

लेकिन अब उनका लहजा बिल्कुल बदला हुआ दिखा.

मनमोहन सिहं के लाल क़िले से दिए गए भाषण के पहले कांग्रेस ने भी अन्ना हज़ारे पर प्रहार किए थे. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने तो उन्हें सर से पांव तक भ्रष्ट बताया था.

जिसके दूसरे दिन ही अन्ना हज़ारे को पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार से उनके अनशन शुरू होने के पहले गिरफ़्तार कर लिया गया था हालांकि जनता के समर्थन को देखते हुए उन्हें शाम में ही छोड़ने के आदेश जारी किए गए.

हालांकि अन्ना हज़ारे ने जेल से ये कहते हुए बाहर आने से मना कर दिया कि वो तबतक बाहर नहीं आएंगे जबतक सरकार उनके अनशन को लेकर सभी शर्तें नहीं मान लेती.

कांग्रेस भी अब रवैये में तबदीली कर बातचीत की बात कर रही है.

युवा सांसद और दिल्ली की मुख्य मंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने तो कल साफ़ तौर पर कहा कि अन्ना हज़ारे को गिरफ़्तार किया जाना ग़लत था.

संबंधित समाचार