जगन समर्थक विधायकों का इस्तीफ़ा

जगन मोहन रेड्डी
Image caption जगन मोहन समर्थक विधायकों के इस्तीफ़े की संभावना

आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी समर्थक 29 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इनमें से 26 विधायकों ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया. इससे सरकार पर एक तरह का राजनीतिक संकट तो आया है मगर इससे सरकार के गिरने की आशंका फ़िलहाल नहीं है.

इन 26 विधायकों के अलावा दो विधायक तेलुगुदेशम् के और एक प्रजा राज्यम् पार्टी का है. कांग्रेस के दो लोकसभा सदस्य- सब्बम हरी और एम राजमोहन रेड्डी भी इस्तीफ़ा देने का मन बना रहे हैं.

इन लोगों ने जगनमोहन रेड्डी के ख़िलाफ़ सीबीआई की छानबीन के प्रति नाराज़ग़ी जताई है.

जगन मोहन की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने आरोप लगाया है कि इसके ज़रिए कांग्रेस वाईएस राजशेखर रेड्डी को बदनाम करने की साज़िश कर रही है.

हालाँकि इस क़दम से कांग्रेस सरकार के गिरने की संभावना नहीं है मगर उसका बहुमत कम ज़रूर हो जाएगा.

आंध्र प्रदेश विधानसभा में 294 सदस्य हैं जिनमें से कांग्रेसी विधायकों की संख्या 150 है. उसमें प्रजा राज्यम् पार्टी के 17 विधायकों के शामिल होने से और मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन के सात विधायकों के समर्थन से कांग्रेस के पास बड़ा बहुमत रहा है.

इस तरह अगर 26 कांग्रेसी विधायक इस्तीफ़ा दे भी दें तब भी कांग्रेस के पास लगभग डेढ़ सौ विधायकों का समर्थन रहेगा जो कि बहुमत से कुछ अधिक है.

सुप्रीम कोर्ट में मामला

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Image caption सीबीआई ने पिछले दिनों जगन मोहन के ठिकानों पर छापे मारे हैं

वैसे वाईएसआर कांग्रेस के एक प्रवक्ता जे प्रभाकर ने दावा किया है कि इसके बाद अभी कम से कम 20 और विधायक ऐसे हैं जो जगन मोहन रेड्डी के समर्थन में इस्तीफ़ा देने को तैयार हैं.

इस बीच प्रजा राज्यम् पार्टी का कांग्रेस में औपचारिक रूप से विलय हो गया है और पार्टी प्रमुख चिरंजीवी सहित 17 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए.

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई जगन मोहन के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति जमा करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे मामलों में जाँच कर रही है.

जगन ने इस छानबीन के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की है जिस पर 24 अगस्त को सुनवाई होनी है मगर सीबीआई जगन मोहन रेड्डी और उनके साथियों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुला सकती है.

ऐसे भी संकेत हैं कि ज़रूरत पड़ने पर जगन को गिरफ़्तार भी किया जा सकता है.

जगन के समर्थक इस बात को भी लेकर नाराज़ हैं कि एफ़आईआर में सीधे-सीधे वाईएस राजशेखर रेड्डी को भी निशाना बनाया गया है और उन्हें एक आपराधिक षड्यंत्र का ज़िम्मेदार बताया गया.

वैसे राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि अगर वाईएसआर का नाम न भी होता तो जगन के समर्थक जगन को बचाने के लिए इस तरह का क़दम ज़रूर उठाते.

त्यागपत्र दे रहे विधायक ऐसे हैं जिन्हें वाईएसआर ने चुनाव में टिकट दिया था.

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के लिए यह नया संकट ऐसे समय पर पैदा हुआ है जबकि तेलंगाना राज्य की माँग को लेकर पहले ही तेलंगाना विधायक इस्तीफ़ा दे चुके हैं हालाँकि विधानसभा अध्यक्ष एन मनोहर ने ऐसे 100 विधायकों के इस्तीफ़े रद्द कर दिए थे.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 और तेलुगुदेशम् के चार विधायक दोबारा इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस विधायकों पर दबाव बना रहे हैं कि वे भी दोबारा इस्तीफ़ा दें.

ऐसे संकेत हैं कि विधान सभा अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी के समर्थकों के इस्तीफ़ पर तुरंत कोई फ़ैसला नहीं करेंगे और अगर ये त्यागपत्र तकनीकी दृष्टि से सही ढंग से नहीं लिखे गए तो उन्हें रद्द भी किया जा सकता है.

वैसे कांग्रेस को ये भी उम्मीद है कि अगर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने जगन के विरुद्ध सीबीआई की छानबीन रुकवाने से इनकार किया तो कई विधायक पीछे हट सकते हैं.

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