'तीन मांगें नहीं मानीं तो अनशन नहीं तोड़ूंगा'

अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट ap
Image caption अन्ना हज़ारे ने अपने अनशन के नवें दिन भी कहा है कि उनकी सेहत ठीक है.

सरकार की ओर से बातचीत की पेशकश के बाद अन्ना हज़ारे ने पहली प्रतिक्रिया में सरकार की नीयत पर उंगली उठाई है.

अन्ना हज़ारे ने कहा, "भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए पहले से ही सरकार की नीयत साफ़ नहीं है, कल बात करने के बावजूद उन्होंने तीन मुद्दे अब भी नहीं माने."

ये तीन मुद्दे गांव से लेकर मंत्रालय तक सभी अफ़सरों को लोकपाल के दायरे में लाने, राज्यों में लोकायुक्त बनाने और सार्वजनिक सेवाएं ना दे पाने पर सरकारी अधिकारियों को दंडित करने के प्रावधान के हैं.

अन्ना ने कहा कि ये तीनों मांगे जब तक सरकार नहीं मानेगी वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे.

एक मज़बूत लोकपाल की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे का अनशन के नौवें दिन भी जारी है और उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई जा रही है.

वहीं अन्ना हज़ारे के सहयोगियों ने सरकार की ओर से नियुक्त किए गए प्रतिनिधि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से दूसरी बार मुलाकात की. ये बैठक क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद के निवास स्थान पर हुई.

बैठक के बाद दोनों पक्षों ने कहा कि चर्चा सही दिशा में की जा रही है हालांकि दूसरे दौर में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.

बातचीत जारी

ग़ौरतलब है कि मंगलवार शाम को प्रणब मुखर्जी और अन्ना हज़ारे के प्रतिनिधियों के बीच लगभग दो घंटे तक बैठक हुई थी.

सीसीपीए की बैठक के तुरंत बाद कांग्रेस कोर ग्रुप की भी आपात बैठक हुई.

बैठक में क्या हुआ इस बारे में मीडिया को कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं दी गई लेकिन समाचार एजेंसी के अनुसार कोर ग्रुप की बैठक में बुधवार दोपहर को होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार और कांग्रेस पार्टी का रूख़ क्या होगा इस पर रणनीति तैयार की गई.

मंगलवार को प्रधानमंत्री ने अन्ना हज़ारे के अनशन और जनलोकपाल के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की थी.

प्रधानमंत्री के आवास सात रेसकोर्स रोड पर हुई बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उनकी अन्ना हज़ारे के सहयोगियों से हुई मुलाक़ात के बारे में जानकारी दी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीसीपीए की बैठक में सरकार और अन्ना हज़ारे के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान जो बातें सामने आई थीं, उन पर विचार विमर्श किया गया.

सरकार की पेशकश

इससे पहले लोकपाल के मुद्दे पर सरकार और अन्ना हज़ारे के बीच जारी गतिरोध को दूर करने के लिए मंगलवार को दिन भर बैठकों का दौर चलता रहा.

इसकी शुरूआत हुई दोपहर में दिल्ली से कांग्रेसी सांसद संदीप दीक्षित के घर पर अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल और का़नून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद की मुलाक़ात के साथ.

उस मुलाक़ात के ज़रिए सलमान ख़ुर्शीद ने अन्ना हज़ारे को संदेश भेजा कि सरकार ने बातचीत के लिए केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रणब मुखर्जी को नियुक्त किया है.

टीम अन्ना ने सरकार का न्यौता स्वीकार कर लिया और अन्ना हज़ारे की तरफ़ से अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी को सरकार से बातचीत के लिए चुना गया.

इसी बीच प्रधानमंत्री ने अन्ना हज़ारे को एक ख़त लिखा और उनसे अनशन तोड़ने की अपील की.

आख़िरकार मंगलवार शाम को लगभग आठ बजे प्रणब मुखर्जी के नॉर्थ ब्लॉक स्थित दफ़्तर में सरकार और टीम अन्ना के बीच बैठक शुरू हुई. सरकार की तरफ़ से प्रणब मुखर्जी के अलावा क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और सांसद संदीप दीक्षित भी बैठक में शामिल थे.

लगभग दो घंटे तक चली बैठक के बाद प्रणब मुखर्जी ने एक छोटा सा लिखित बयान मीडिया के सामने पढ़ दिया.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption मंगलवार को मुंबई में पुलिस अधिकारियों की पत्नियों ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ रैली निकाली.

उस बयान में प्रणब मुखर्जी ने कहा, ''टीम अन्ना से बातचीत जारी रहेगी. इस बारे में कल यानि बुधवार को सर्वदलीय बैठक में चर्चा होगी. मुझे आशा है कि हमलोग इस समस्या का समाधान ढूंढ लेंगे.''

अन्ना हज़ारे के सहयोगियों ने सरकार के साथ हुई बैठक का पूरा ब्यौरा देते हुए कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बन गई है लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.

सरकार सहमत

प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर सरकार को कोई ख़ास आपत्ति नहीं है.

उन्होंने ये भी कहा कि सरकार सीबीआई के भ्रष्टाचार निरोधक युनिट और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को भी लोकपाल के दायरे में लाने के लिए तैयार हो गई है.

अरविंद लोकपाल ने कहा कि सरकार जनलोकपाल बिल के मसौदे को क़ानून मंत्रालय के पास भेजने को तैयार हो गई है.

क़ानून मंत्रालय उसमें कुछ बदलाव करके उसे टीम अन्ना के पास दोबारा भेजेगा.

उसके बाद अगर टीम अन्ना को उन बदलावों पर कोई आपत्ति नहीं हुई तो उसे संसद के इसी सत्र में पेश किया जाएगा. केजरीवाल ने ये भी कहा कि सरकार को ये विश्वास दिलाना होगा कि वो संसद में इस बिल को पारित कराने के लिए इसका समर्थन करेगी.

मतभेद

लेकिन अरविंद केजरीवाल के मुताबिक़ अभी भी तीन मुख्य मुद्दों पर सरकार और टीम अन्ना में मतभेद बने हुए हैं.

केजरीवाल के अनुसार निचले श्रेणी के सरकारी अधिकारियों को लोकपाल के दायरे में लाने के जनलोकपाल बिल की सिफ़ारिश को सरकार ने मानने से इनकार कर दिया है.

लेकिन केंद्र में लोकपाल के अलावा राज्यों में लोकायुक्त के गठन की टीम अन्ना की सिफ़ारिश पर सरकार ने विचार करने को कहा है.

इसके अलावा हर विभाग में नागरिकों के चार्टर बनाए जाने की मांग पर भी सरकार ने विचार करने को कहा है.

केजरीवाल के अनुसार न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग को लेकर सरकार ने कहा है कि वो इसके लिए एक दूसरा क़ानून बना रही है. इस मामले में टीम अन्ना की मांग है कि न्यायपालिका से संबंधित का़नून और लोकपाल का़नून साथ-साथ बनने चाहिए.

संबंधित समाचार