तीनों लोकपाल मसौदे के अहम बिंदु

प्रधानमंत्री

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Image caption प्रधानमंत्री ने पूर्व में कहा था कि उन्हें निजी रुप से प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर आपत्ति नहीं है

जनलोकपाल- (अन्ना टीम)- प्रधानमंत्री को शामिल किया जाए. भ्रष्टाचार की शिकायत सात सदस्यों वाली लोकपाल की पीठ सुने. प्रथम दृष्टया सबूत पर्याप्त पाए जाने पर लोकपाल इस मामले की जांच करे. प्रथम दृष्टया सबूत न होने पर शिकायत ख़ारिज़ हो और शिकायत करने वाले को सज़ा दी जाए.

लोकपाल (सरकारी मसौदा)- प्रधानमंत्री शामिल न हों.पद छोड़ने के बाद प्रधानमंत्री को लोकपाल में शामिल किया जाए. इसमें सात वर्ष का समय दिया गया है ताकि पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल भी इसमें आ सके.

एनसीपीआरआई (अरुणा राय और निखिल डे ग्रुप)-प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ तब तक जांच न की जाए जब तक लोकपाल की पूरी बेंच भारत के मुख्य न्यायाधीश को सिफारिश न करे. फिर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में पूर्ण खंडपीठ शिकायत की जांच करे और आगे जांच के बारे में फैसला करे. अगर प्रधानमंत्री का भ्रष्टाचार से सीधा संबंध न हो बल्कि सरकार का प्रमुख होने के नाते उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया गया हो तो शिकायत वाजिब न मानी जाए.

अगर भ्रष्टाचार की जांच के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कोई सूचना देनी हो तो प्रधानमंत्री इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश को गुप्त रुप से ये सूचना दें. यह सूचना लोकपाल को देने का फ़ैसला न्यायाधीश का हो.

सांसदों का मामला

Image caption सांसदों के संसद में बर्ताव को भी लोकपाल में शामिल करने की मांग

जनलोकपाल (टीम अन्ना)- सभी सांसदों को शामिल किया जाए. संसद में रिश्वत और संसद में उनके बोलने के मामलों में अगर भ्रष्टाचार का मामला बनता हो तो इसकी शिकायत सात सदस्यीय लोकपाल बेंच से हो. (इस बेंच में बहुमत न्यायपालिका से जुड़े लोगों काक होगा). प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर एफआईआर दर्ज़ करने की अनुमति मिले. मामले की जांच पुलिस या सीबीआई करे. मामला बने तो सज़ा दी जाए. शिकायत ग़लत पाए जाने पर शिकायतकर्ता को सज़ा (ज़ुर्माना) दी जाए.

सरकारी लोकपाल – सांसदों को शामिल किया जाए लेकिन उनके ख़िलाफ़ आरोपों की जांच संसद करे.

एनसीपीआरआई- सांसदों को शामिल किया जाए लेकिन जांच प्रक्रिया के बारे में मसौदे में स्पष्ट जानकारी नहीं.

न्यायपालिका

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Image caption न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे में लाने की बात हो रही है.

जनलोकपाल (अन्ना टीम)- न्यायपालिका को भी लोकपाल में शामिल किया जाए.सात सदस्यीय लोकपाल की बेंच शिकायत सुने. प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर एफआईआर की अनुमति दे. पुलिस या सीबीआई जांच करे. अगर मामला बनता हो तो सज़ा दी जाए.

सरकारी लोकपाल- न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में न रखा जाए बल्कि उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल में शामिल किया जाए. इसके तहत तीन सदस्यीय कमिटी (दो जज और एक रिटायर्ड चीफ़ जस्टिस) जांच करे और एफआईआर दायर करने की अनुमति दे.

एनसीपीआरआई- न्यायपालिका को न्यायपालिका लोकपाल (ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी कमीशन) में शामिल किया जाए. मूल रुप से ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल को मज़बूत करने की बात.

सरकारी अधिकारी या लोकशाही

Image caption अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं.

जनलोकपाल अन्ना टीम- सभी सरकारी अधिकारियों को जो जनसेवक के दायरे में आते हैं. लोकपाल के दायरे में लाया जाए.

सरकारी लोकपाल- सिर्फ ग्रुप ए और उससे ऊपर के अधिकारियों को लोकपाल में शामिल किया जाए.

एनसीपीआरआई- ग्रुप ए और उससे ऊपर के अधिकारियों को लोकपाल में शामिल किया जाए और उनके ख़िलाफ़ जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग करे. इसके लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम को मज़बूत किया जाए.

लोकपाल की नियुक्ति

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Image caption अन्ना हज़ारे जनलोकपाल के मुद्दे पर अनशन कर रहे हैं.

जनलोकपाल अन्ना टीम- जनलोकपाल विधेयक के तहत ही राष्ट्रीय स्तर पर लोकपाल बने और इसी आधार पर लोकायुक्तों की राज्यों में नियुक्ति हो.

सरकारी लोकपाल- सिर्फ़ केंद्र में लोकपाल बने. विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र के लोकपाल या जनलोकपाल विधेयक के ज़रिए लोकायुक्त बनाने पर आपत्ति की है.

एनसीपीआरआई- इस मसौदे के तहत राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो और उन्हें भी केंद्र के लोकपाल के बराबर की शक्तियां दी जाएं.

लोकपाल की शक्तियां/जांच/शिकायत

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Image caption हज़ारों की संख्या में लोग जनलोकपाल लागू करने की मांग कर रहे हैं.

जनलोकपाल अन्ना टीम- लोकपाल के पास जांच और मामला चलाने के लिए अलग टीम होंगी.लोकपाल की जवाबदेही जनता के प्रति होगी. आम जनता लोकपाल के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत करे और उन्हें हटाने की मांग कर सकती है. लोकपाल को हटाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति को होगा. जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट सिफारिश करे. सुप्रीम कोर्ट की जांच के बाद कोर्ट राष्ट्रपति से लोकपाल को हटाने की सिफारिश करे.

सरकारी लोकपाल- लोकपाल सरकार के प्रति जवाबदेह है. लोकायुक्त या लोकपाल को हटाने की शक्ति सरकार के पास हो. लोकपाल के पास जांच और मामला चलाने के लिए अलग टीम हो.

एनसीपीआरआई- लोकपाल के पास जांच और मामला चलाने के लिए अलग टीम हो. सुप्रीम कोर्ट में शिकायत के बाद लोकपाल के ख़िलाफ़ जांच की जाए और फिर कोर्ट लोकपाल को बर्खास्त करने की सिफारिश राष्ट्रपति से करे.