'जनलोकपाल' समिति को भेज देंगे: पीएम

मनमोहन सिंह और अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption लालक़िले से दिए भाषण में प्रधानमंत्री ने अनशन को ग़लत ठहराया था

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना हज़ारे को पत्र लिखकर कहा है कि अगर लोकसभा अध्यक्ष ने अनुमति दी तो सरकार टीम अन्ना की ओर से तैयार किए गए 'जनलोकपाल विधेयक' को को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने को तैयार है.

प्रधानमंत्री ने अन्ना हज़ारे को एक लंबा पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने अन्ना के स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा है कि स्थायी समिति जनलोकपाल बिल के पहलुओं पर भी पूरा विचार करेगी.

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इस पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘‘अगर अन्ना को समय और कार्रवाई की गति के बारे में शक है तो सरकार स्थायी समिति से औपचारिक तौर पर आग्रह करेगी कि वो इस बिल पर पर्याप्त समय देकर इस पर तीव्र गति से काम करे.’’

पत्र लिखने के अलावा प्रधानमंत्री ने टीम अन्ना से चर्चा करने के लिए सरकार के प्रतिनिधि के रूप में वरिष्ठ नेता और वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी को नियुक्त किया है.

प्रणब करेंगे टीम अन्ना से बातचीत

सरकार के इस प्रस्ताव को टीम अन्ना ने स्वीकार भी कर लिया है.

चिंता

मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में अन्ना हज़ारे को लिखा है कि उनका और अन्ना हज़ारे का लक्ष्य एक ही है और वो यह कि अगर देश से भ्रष्टाचार को ख़त्म न भी किया जा सके तो कम से कम उसे उल्लेखनीय ढंग से कम किया जाए.

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा है, "हमारे रास्ते और तरीक़े को लेकर मतभेद हो सकते हैं लेकिन मैं मानता हूँ कि इस मतभेद को बढ़ाचढ़ाकर बताया गया है. "

पत्र में प्रधानमंत्री ने लिखा है कि ‘‘सरकार के प्रस्तावित लोकपाल विधेयक का मसौदा स्थायी समिति के पास है और स्थायी समिति को न केवल इस मसौदे के हर बिंदू पर बल्कि जनलोकपाल और दूसरे अन्य मसौदों जैसे कि अरुणा राय के दिए गए मसौदे पर भी चर्चा करने का पूरा अधिकार है लेकिन अन्ना की टीम की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि वो लोकसभा के स्पीकर से ये आग्रह करेंगे कि जनलोकपाल को भी स्थायी समिति को भेजा जाए ताकि उस पर भी विचार हो सके.’’

प्रधानमंत्री ने पत्र में बार-बार अन्ना के स्वास्थ्य पर चिंता जताई है और उम्मीद जताई है कि अन्ना उनके सुझावों के मद्देनज़र अपना अनशन खत्म करेंगे.

प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘ मैं और मेरी सरकार आपके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं. आपके अनशन से आपकी तबीयत ख़राब हो रही है. हमें आपकी राय औऱ सुझाव चाहिए. मैंने अपनी बात रखी है. मैं उम्मीद करता हूं कि आप मेरे सुझावों पर विचार करेंगे और अनशन समाप्त करेंगे.’’

हालांकि प्रधानमंत्री ने पत्र में ये भी साफ़ किया है कि बिल के बारे में जहां सिविल सोसायटी या किसी से भी बात करने के लिए सरकार तैयार है लेकिन सबको ये ध्यान में रखना होगा कि संसद सर्वोच्च है और क़ानून बनाते समय संवैधानिक नियमों को मानना ही पड़ेगा.

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