अनशन तोड़ने के लिए अन्ना की तीन शर्तें

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सरकारी लोकपाल का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि उन्होंने तीन मुद्दे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास भेजे हैं और उनसे कहा है कि वे उस पर शुक्रवार को बहस शुरू करें.

अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अगर संसद में इस पर बहस होती है और सहमति होती है, तो वे अनशन छोड़ने पर विचार करने को तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे अपना अनशन नहीं छोड़ेंगे, चाहे उनकी जान चली जाए. अन्ना हज़ारे ने कहा कि पहले वे तीन मुद्दों पर सरकार को परखना चाहते हैं. लेकिन वे बाक़ी के मुद्दों को छोड़ेंगे नहीं.

उन्होंने कहा कि अगर इन मुद्दों पर सहमति होती है, तो वे सिर्फ़ अनशन छोड़ेंगे जगह नहीं. वे धरना आगे भी जारी रखेंगे.

अन्ना हज़ारे ने जो तीन मुद्दे सामने रखे हैं, वे हैं- सभी सरकारी कर्मचारी लोकपाल के दायरे में आना चाहिए, हर राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति और सिटीज़न चार्टर.

सवाल

उन्होंने सरकार पर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें धोखा देने की कोशिश की गई है. उन्होंने संसद की ओर से अनशन तोड़ने की अपील पर अपना आभार जताया लेकिन कई गंभीर सवाल भी उठाए.

अन्ना हज़ारे ने कहा, "प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्हें अन्ना के स्वास्थ्य की चिंता है. लेकिन अगर उन्हें इतनी चिंता थी तो वे पहले क्यों नहीं बोले. हम छह महीने से ये बात कर रहे हैं."

उन्होंने कहा कि कभी-कभी प्रशंसा के बाद धोखा भी हो जाता है. अन्ना हज़ारे ने कहा कि पहले भी उनके साथ धोखा हुआ है.

उन्होंने समर्थकों से अपील की कि क्रांति की मशाल जनता ने जलाई है, इसे बुझने न देना. अन्ना रहे ना रहे, मशाल जलती रहेगी.

अन्ना ने कहा, "माल खाए मदारी और नाच करे बंदर. कृषि प्रधान देश में किसानों की क्या हालत है, ग़रीबों का क्या हाल है."

उन्होंने विपक्षी दलों पर भी चुटकी ली और कहा कि विपक्षी दल क्यों चुप है. शायद उन्हें डर है कि जनलोकपाल आने से उनके हाथ से सत्ता निकल जाएगी.

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