अन्ना ने दिया सरकार को लिखित आश्वासन

अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट AFP

पिछले ग्यारह दिनों से अनशन कर रहे अन्ना हज़ारे ने सरकार को लिखित आश्वासन दिया है कि अगर उनके उठाए गए तीन मुद्दों पर संसद में सहमति बनती है तो वे अपना अनशन ख़त्म कर देंगे.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अनशन ख़त्म करने के बाद बाक़ी मुद्दों पर सहमति बनने तक वे रामलीला मैदान पर ही आंदोलन करते रहेंगे.

अन्ना हज़ारे से ऐसा आश्वासन सरकार ने मांगा था.

ख़बरें है कि अन्ना हज़ारे के इस पत्र पर सरकार की ओर से विचार किया जा रहा है. संभावना है कि इसके बाद लोकसभा में इन तीन मुद्दों पर चर्चा करने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

उल्लेखनीय है कि अन्ना हज़ारे ने कहा है कि जनलोकपाल के तीन अहम मुद्दों पर संसद में प्रस्ताव लाना चाहिए, इसमें से एक यह है कि इसी क़ानून के ज़रिए लोकायुक्त भी बनाए जाएँ, दूसरा हर विभाग में जन समस्याओं के लिए सिटिज़न्स चार्टर बनाए जाए जिसे न मानने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो और तीसरा ये कि केंद्र सरकार के ऊपर से नीचे तक सभी कर्मचारियों और राज्य के सभी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाए.

अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि इन तीनों मुद्दों पर भाजपा, सीपीए, जेडीयू, शिवसेना और तेलुगूदेशम पार्टी ने पूरा समर्थन देने का वादा किया है.

प्रशांत भूषण ने कहा है कि अगर संसद में ये प्रस्ताव पारित हो जाता है तभी अन्ना हज़ारे अपना अनशन ख़त्म करेंगे. लेकिन अगर ये प्रस्ताव पारित नहीं हो पाता है तो इसका फ़ैसला ख़ुद अन्ना करेंगे कि आगे क्या करना है.

अन्ना हज़ारे भी सरकार की ओर से लिखित आश्वानस मांगते रहे हैं लेकिन अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि अन्ना के आश्वासन के बदले क्या सरकार भी उन्हें लिखित आश्वासन देगी.

अन्ना की चिट्ठी

अरविंद केजरीवाल ने रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री को लिखी अन्ना हज़ारे की चिट्ठी को पढ़कर सुनाया.

अन्ना ने अपनी चिट्ठी में पहले इस बात की सफ़ाई दी है कि उनकी मंशा संसद के अपमान की नहीं है.

उन्होंने लिखा है, "हमारे मन में हमारी संसद के प्रति अपार सम्मान है, हमारी संसद हमारे जनतंत्र का पवित्र मंदिर है. मैं अनशन पर अपने किसी स्वार्थ के लिए नहीं बैठा, जिस तरह से आप लोग देश की भलाई के लिए काम कर रहे हैं उसी तरह से मैं भी देश के लोगों के बारे में ही सोचता रहता हूँ."

अन्ना हज़ारे ने लिखा है कि उनके पास किसी प्रकार की कोई सत्ता नहीं है और वे एक बहुत सामान्य आदमी हैं और समाज व ग़रीब जनता के लिए कुछ करने की भावना रखते हैं.

उन्होंने इस पर भी सफ़ाई दी है कि वे किसी व्यक्ति या सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने लिखा है, "हमारा आंदोलन किसी व्यक्ति या पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं है. हम भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हैं. हम भ्रष्ट व्यवस्था में परिवर्तन चाहते हैं."

अन्ना हज़ारे ने कहा है, "यदि हमारे आंदोलन के दौरान मेरे अथवा मेरे किसी साथी के द्वारा कुछ ऐसे शब्द कहे गए किए गए हों जिससे आपको या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँची हो तो मैं हम सबकी तरफ़ से दिलगीर व्यक्त करता हूँ. किसी को आहत करना हमारा मक़सद नहीं है."

अपने अनशन के ग्यारहवें दिन अन्ना हज़ारे ने जनलोकपाल बिल के उन तीन मुद्दों को दोहराया है जिस पर संसद में प्रस्ताव लाए जाने की बात है. उन्होंने लिखा है, "हर राज्य में इसी क़ानून के ज़रिए लोकायुक्त भी बनाए जाएँ, हर विभाग में जन समस्याओं के लिए सिटिज़न्स चार्टर बनाए जाए जिसे न मानने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो और तीसरा ये कि केंद्र सरकार के ऊपर से नीचे तक सभी कर्मचारियों और राज्य के सभी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाए."

सरकार की शर्तों के अनुसार अनशन को लेकर आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा, "क्या इन तीन बातों पर संसद में प्रस्ताव लाया जा सकता है? मुझे उम्मीद ही नहीं यक़ीन है कि हमारे सभी सांसद देश की जनता को भ्रष्टाचार के रोज़-रोज़ के ज़िल्लत से निजात दिलाने के लिए शुरु में राज़ी हो जाएंगे. मेरी अंतरात्मा कहती है कि इन बातों पर अगर संसद में सहमति होती है तो मैं अपना अनशन तोड़ दूँ."

लेकिन अन्ना हज़ारे ने स्पष्ट किया है कि अनशन ख़त्म करने के बाद भी उनका आंदोलन जारी रहेगा, "जनलोकपाल बिल की बाक़ी बातें , जैसे चयन प्रक्रिया आदि भी भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं मैं मेरी जनता के साथ तब तक रामलीला मैदान में बैठा रहूँगा जब तक बाक़ी सारे मुद्दों पर संसद में निर्णय नहीं हो जाता क्योंकि यही जनता की आवाज़ है."

देश भर में चल रहे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और सांसदों से भी अपील की है.

संबंधित समाचार