गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति पर विवाद

Image caption मोदी मंत्रीमंडल की सलाह के बिना ही राज्यपाल ने लोकायुक्त की नियुक्ति की

एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए गुजरात की राज्यपाल ने राज्य सरकार की सलाह के बिना ही एक सेवानिवृत जज जस्टिस आरए मेहता को राज्य का लोकायुक्त नियुक्त किया है.

गुजरात सरकार ने गवर्नर के फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राज्यपाल कमला ने कहा है कि वे गुजरात के घटनाक्रम के प्रति 'मूक दर्शक' नहीं बनी रह सकतीं.

गुजरात में साल 2003 से लोकायुक्त का नियुक्ति का मामला अटका पड़ा है.

'असंवैधानिक और एकतरफ़ा'

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में राज्यपाल की इस नियुक्ति को चुनौती देते हुए कहा है कि ये निर्णय 'असंवैधानिक और एकतरफ़ा' है.

राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति का मुद्दा काफ़ी विवादों में रहा है. सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे पर इस नियुक्ति को टालने का आरोप लगाते रहे हैं.

शुक्रवार को गुजरात के राज्यपाल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "हालांकि ये सच है कि राज्यपाल मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले मंत्रीमंडल की सलाह पर चलते हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति आ सकती है जब राज्यपाल राज्य में हो रही घटनाओं का मूक दर्शक बना नहीं रह सकता."

बयान में आगे कहा गया है, "इसलिए गुजरात लोकायुक्त एक्ट की सेक्शन 3(1) के तहत डॉक्टर श्रीमती कमला ने 25 अगस्त को अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए, रिटायर्ड जस्टिस आरए मेहता को पारदर्शीता और सुशासन के हित में राज्य का लोकायुक्त नियुक्त किया है."

बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार को लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए कई बार याद दिलाई गई लेकिन सरकार इस मुद्दे को टालती रही.

राज्यपाल के फ़ैसले को चुनौती

गुजरात के कानून राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने हाई कोर्ट में राज्यपाल के फ़ैसले को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक और एकतरफ़ा क़रार दिया है.

राज्य सरकार का मत है कि संविधान की धारा 154 के तहत राज्यपाल मंत्रीमंडल की सलाह पर कार्य करने के लिए बाधित है. और राज्यपाल ने ये निर्णय बिना मुख्यमंत्री या मंत्रीमंडल की सलाह के लिया.

इस केस की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

गुजरात सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल ने नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ किया है.

जयनारायण व्यास ने कहा, "गुजरात लोकायुक्त एक्ट के नियम 3 के तहत राज्यपाल को लोकायुक्त की नियुक्ति का अधिकार है. लेकिन ये नियम अकेले में नहीं पढ़ा जा सकता, इसे संविधान के प्रावधानों के साथ पढ़ा जाना चाहिए. और संविधान कहता है कि राज्यपाल मंत्रीमंडल के सुझावों पर काम करने के लिए बाध्य है."

जयनारायण व्यास ने भी दोहराया कि इस मामले में गवर्नर ने एकतरफ़ा निर्णय लिया है.

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