'सीपीएम मुख्य मुद्दों से सहमत'

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Image caption टीम अन्ना के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों से चर्चा कर रहे हैं

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश करात से मुलाक़ात के बाद टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा है कि सीपीएम भी आमतौर पर जनलोकपाल के मुद्दों से सहमत है.

उनका कहना था कि पार्टी को कुछ मुद्दों पर संशय था और इसलिए उन्होंने सीपीएम नेता से मिलकर उनसे चर्चा की है.

प्रशांत भूषण के अनुसार, "सीपीएम आमतौर पर जनलोकपाल बिल के मुख्य प्रावधानों का समर्थन करती है."

अन्ना के अनशन के बारे में उन्होंने कहा है कि जब तक संसद ठोस प्रस्ताव पारित नहीं करती है तब तक कुछ हासिल नहीं हो सकेगा.

'चर्चा पर्याप्त नहीं, प्रस्ताव पारित हो'

सीपीएम नेता से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि सिर्फ़ संसद में चर्चा करना पर्याप्त नहीं है.

उनका कहना था, "लोकपाल बिल पर पिछले 42 सालों से संसद में चर्चा हो रही है. आठ बार इसे संसद में पेश किया गया है और आठ बार इसे स्थाई समिति के पास भेजा जा चुका है."

प्रशांत भूषण ने कहा, "या तो सरकार एक वैकल्पिक विधेयक संसद में पेश करे या फिर ऐसा प्रस्ताव पारित करे जिससे आम आदमी को राहत मिल सके."

उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्ना हज़ारे तीन मुद्दों पर संसद में चर्चा चाहते हैं, एक निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाना, दूसरा राज्यों में लोकायुक्तों को लोकपाल के दायरे में लाना और तीसरा सिटिज़न चार्टर को लोकपाल में शामिल करना.

लोकसभा में नियमों को लेकर हुए सवाल पर प्रशांत भूषण ने कहा, "नियम 388 के तहत सांसदों को अधिकार है कि वो कोई भी प्रस्ताव पारित करके बाक़ी सभी नियमों को निरस्त कर सकती है."

प्रधानमंत्री को संशोधित जनलोकपाल विधेयक की प्रति भेजे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है.

उल्लेखनीय है कि ऐसी ख़बरें मिल रही थीं कि अरविंद केजरीवाल एक संशोधित विधेयक के साथ प्रधानमंत्री से मिलने गए हैं.

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