राजीव गांधी की हत्या के लिए तीन को फांसी

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अधिकारियों ने कहा है कि पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के तीन दोषियों को नौ सितंबर को फांसी चढ़ा दिया जाएगा.

राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेंरबदूर में की गई थी.

तमिलनाडु की जिस जेल में ये तीनों दोषी क़ैद हैं, वहां के एक अधिकारी ने कहा है कि इन्हें नौ सितंबर तड़के मृत्युदंड दिया जाएगा.

फांसी देने फ़ैसला राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका ख़ारिज किए जाने के बाद लिया गया है.

इन तीन दोषियों के नाम हैं मुरुगन, संथन और पेरारीवालन.

राजीव गांधी की मौत एलटीटीई के आत्मघाती हमले में हुई थी. इन तीनों को उस हत्या की साज़िश रचने के लिए दोषी पाया गया था.

एलटीटीई का 'खेद'

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Image caption गंगा में राजीव गांधी की अस्थियां विसर्जित करते राहुल गांधी.

मुरुगन और संथन श्रीलंका के नागरिक हैं जबकि पेरारीवालन भारतीय तमिल है.

साल 2006 में एलटीटीई ने राजीव गांधी की हत्या पर खेद व्यक्त किया था.

वर्ष 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों को नीचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सज़ा को सही ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट ने एक भारतीय तमिल महिला और मुरुगन की पत्नी नलिनी श्रीहरन की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में तबदील कर दिया था.

दोषियों के वकील पुगाज़ेंधी ने बीबीसी की तमिल सेवा को बताया, "तीनों दोषियों को शुक्रवार को व्यक्तिगत तौर पर बता दिया गया है कि उन्हें फांसी लगाई जाएगी."

वकील ने कहा कि उनके मुवक्किलों को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत हस्ताक्षेप की उम्मीद थी.

हस्ताक्षेप की उम्मीद

वकील ने कहा, "चूंकि राजनीतिक हस्ताक्षेप के कोई संकेत नहीं मिले हैं, हम अन्य क़ानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं."

तीन दोषियों में से एक पेरारीवालन की मां ने बीबीसी की तमिल सेवा को बताया है कि उनका पुत्र अपने ऊपर लगे अभियोग को अस्वीकार करता रहा है. पेरारीवालन की मां का मानना है कि उनके बेटे को दी जाने वाली सज़ा दबाव में दी गई स्वीकारोक्ति पर आधारित है.

भारत में सज़ा-ए-मौत आम नहीं है. अंतिम बार साल 2004 में कोलकाता में एक 41 वर्षीय पूर्व सिक्युरिटी गार्ड को 14 साल की स्कूली छात्रा की बलात्कार के बाद हत्या करने के लिए फांसी पर चढ़ाया गया था.

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