अन्ना के मुद्दों को कांग्रेस-भाजपा का समर्थन

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लोकसभा में अन्ना हज़ारे के तीन मुद्दों का मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और सत्तारूढ़ गठबंधन का नतृत्व कर रही कांग्रेस दोनों ने समर्थन किया है.

इसके अलावा जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव और तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने भी इसका समर्थन किया है.

बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने राज्यसभा में अन्ना के तीन मुद्दों में से सिटीज़न्स चार्टर का तो समर्थन किया है लेकिन राज्यों के छोटे अधिकारियों और लोकायुक्तों की नियुक्ति को लोकपाल के दायरे में लाए जाने पर अपनी पार्टी की असहमतियों का ज़िक्र किया है.

भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने इन तीनों मुद्दों का समर्थन करने के अलावा प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की और सीबीआई को स्वायत्त संस्था बनाने की मांग की है.

उधर राज्यसभा में अरुण जेटलीने तीनों मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि क़ानून ऐसा बने जिससे संघीय ढांचे को नुक़सान न हो. जहाँ केंद्र का अधिकार क्षेत्र हो वहाँ केंद्रीय कानून लागू हो और जहाँ राज्य क़ानून बना सकते हो वो करें.

भाजपा का समर्थन

कांग्रेस की ओर से संदीप दीक्षित ने कहा है वे इन तीनों मुद्दों का समर्थन करते हैं और उनका मानना है कि छोटे अधिकारियों को लोकपाल के दायरे में लाए जाने से भ्रष्टाचार से सबसे प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा.

राज्यसभा में कांग्रेस के नेता और केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने इन तीनों मुद्दों पर किंतु-परंतु के साथ अपनी बात रखी है. हालांकि उन्होंने इन मु्द्दों का विरोध नहीं किया है.

प्रणब ने रखे बहस के लिए तीन मुद्दे

अन्ना हज़ारे के तीन मुद्दों पर चर्चा करने का प्रस्ताव प्रबण मुखर्जी ने कहा लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगह रखा और सांसदों से अपील की कि वे संविधान के दायरे में और संसद की सर्वोच्चता को ध्यान में रखते हुए इस पर सहमति बनाने का प्रयास करें.

उल्लेखनीय है कि अन्ना हज़ारे ने कहा है कि वे तीन मुद्दों पर संसद की सहमति चाहते हैं और अगर सहमति बन गई तो वे अपना अनशन ख़त्म करने पर विचार कर सकते हैं.

जनलोकपाल के तीन अहम मुद्दों पर संसद में प्रस्ताव लाने की मांग अन्ना ने रखी है, इसमें से एक यह है कि इसी क़ानून के ज़रिए लोकायुक्त भी बनाए जाएँ, दूसरा हर विभाग में जन समस्याओं के लिए सिटिज़न्स चार्टर बनाए जाए जिसे न मानने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो और तीसरा ये कि केंद्र सरकार के ऊपर से नीचे तक सभी कर्मचारियों और राज्य के सभी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाए.

भाजपा का समर्थन

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Image caption सुषमा स्वराज ने कहा कि वे न्याय पालिका में सुधार के लिए आयोग का गठन के पक्ष में हैं

विपक्ष की नेता ने कहा राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति को भी लोकपाल के दायरे में लाना संभव है. केंद्रीय लोकपाल बिल उदाहरण के तौर पर काम कर सकता है.

इसी तरह सिटीज़न्स चार्टर के मामले में भाजपा शासित राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि उसे केंद्र में रखकर 'लोकसेवा प्रदाय गारंटी विधेयक' बनाया जा सकता है. इससे लोगों के काम जल्दी होने में मदद मिलेगी.

निचले स्तर के सरकारी अधिकारियों को लोकपाल के भीतर लाने के बारे में स्वराज ने कहा कि लोग छोटे भ्रष्टाचार से बचना चाहते हैं. उनका मानना था कि लोकपाल लोगों के इस मर्ज़ का इलाज होगा.

स्वराज ने सुझाव दिया कि लोकपाल के नीचे छोटे 11 लोकपाल बनाये जा सकते हैं. उनका कहना था कि उनकी पार्टी इस बात से सहमत है की छोटे स्तर के सरकारी अधिकारी लोकपाल के दायरे में आयें.

इससे पहले उन्होंने लोकपाल विधेयक पर सरकार के रवैया पर चर्चा की और शून्य काल में राहुल गांधी के दिए गए भाषण की निंदा की.

कांग्रेस ने भी सहमति दी

जिस तरह से लोकपाल की नियुक्ति होगी उसी तरह से लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में उन्होंने कहा कि इसके लिए रास्ता निकाला जा सकता है और सरकार को इसके लिए प्रावधान किए जाने चाहिए.

सिटीज़न्स चार्टर पर उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने भाजपा शासित राज्यों का नाम लिया लेकिन टीम अन्ना ने कांग्रेस शासित राज्यों की भी तारीफ़ की है.

उनका कहना है कि सिटीज़न्स चार्टर सिस्टम बन रहा है लेकिन उसे लोकपाल से जोड़ने के लिए एक मॉडल तैयार करना होगा क्योंकि हर लोकशिकायत को भ्रष्टाचार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता.

राज्यों के छोटे कर्मचारियों पर उन्होंने कहा, "छोटे अधिकारियों से ज़्यादातर आम आदमी जूझता है, हमारे थानेदार से लेकर गश्ती हवलदार तक, हमारे फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसर से लेकर हमारे फ़ॉरेस्ट गार्ड तक और तहसीलदार से लेकर पटवारी तक, कभी-कभी अस्पताल के सेवक से भी दो दो हाथ करने पड़ते हैं. इसलिए छोटे अधिकारियों को लोकपाल से बाहर रखना जनहित में नहीं होगा."

उनका कहना था कि छोटे अधिकारियों को लोकपाल में रखने के लिए संवैधानिक ढाँचा कैसा होगा इस पर हमें विचार करना होगा.

उन्होंने कहा कि अन्ना हज़ारे की इस मांग के लागू होने से भ्रष्टाचार से सबसे प्रभावी तरीक़े से निपटा जा सकेगा, हो सकता है कि इसमें थोड़ा सा समय मिल सके.

अन्य नेताओं का समर्थन

जनता दल यूनाइटेड के नेता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संयोजक शरद यादव ने अन्ना हज़ारे के तीनों मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि ये ध्यान रखना होगा कि लोकपाल चुनने की प्रक्रिया में दलितों और पिछड़ों को भी शामिल किया जाना चाहिए.

उन्होंने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि रामलीला मैदान में कुछ लोग संसद के सदस्यों और राजनीतिज्ञों का माखौल उड़ा रहे हैं.

इससे पहले समाजवादी के रेवती रमण सिंह ने भी ये मुद्दा उठाया कि लोकपाल के चयन के लिए बनने वाली समिति में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए.

उन्होंने मीडिया को भी लोकपाल के दायरे में लाए जाने की मांग की.

सरकार में शामिल तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने भी अन्ना हज़ारे के तीनों मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इन मुद्दों का समर्थन करती है.

उनका कहना था कि संसद की सर्वोच्चता को ध्यान में रखना चाहिए लेकिन इस सच्चाई की ओर भी ध्यान देना चाहिए कि संसद में हो रही बहसों और चर्चाओं से आम जनता को फ़ायदा नहीं पहुँच पा रहा है.

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