अन्ना के तीन मुद्दों से भाजपा सहमत

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Image caption सुषमा स्वराज ने प्रधामंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की

भाजपा और एनडीए की तरफ से बोलते हुए सुषमा स्वराज ने बहस की शुरुआत की और अन्ना हज़ारे के उन मुद्दों का समर्थन किया जिस पर वे संसद की सहमति चाहते हैं.

इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को स्वायत्त संस्था बनाने की मांग की है.

सुषमा स्वराज ने लोकसभा को याद दिलाया कि पहला लोकपाल विधेयक 1968 में आया था और यह नौवीं बार यह बिल लाया गया है.

विपक्ष की नेता ने कहा कि दो साल से लगातार सामने आ रहे लाखों लाख करोड़ के घोटालों से लोग बौखला गए हैं. उन्होंने कहा की सरकार जो लोकसभा में लोकपाल बिल लाई वो कुंद था और सरकार की भ्रष्टाचार से लड़ने के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखाता था.

सुषमा स्वराज ने एक बार फिर अन्ना हजारे को सलाम किया और उनके आंदोलन की तारीफ़ की.

'राष्ट्रीय न्यायिक आयोग बने'

नेता प्रतिपक्ष ने कहा " ऐसे समय जब गबन के आरोप में बंद कोई पूर्व केंद्रीय मंत्री यह कहता हो कि वो गवाह के तौर पर प्रधानमंत्री को बुलाना चाहता है तब अगर प्रधानमंत्री अपने आप को लोकपाल के दायरे से बाहर रखेगें तो लोग सरकार की मंशा पर भरोसा कैसे करेगें."

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में आएं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और जन व्यवस्था के लिए कुछ ज़रूरी क़दम से जुड़े मामलों में वो लोकपाल के दायरे से बाहर हों.

न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने के बारे में उन्होंने कहा कि लोकपाल न्यायपालिका में बढ़ते भ्रष्टाचार का समाधान नहीं है ना ही सरकार का प्रस्तावित न्यायिक जवाबदेही बिल.

लोकसभा में विपक्ष की नेता ने कहा कि एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग को बनाना ही ऐसा रास्ता होगा जिससे नयापलिका की स्वायत्तता भी बनी रहेगी और उसमें फ़ैल रहे भ्रष्टाचार से भी निपटा जा सकेगा.

उन्होंने सुझाव दिया कि यह आयोग जजों की नियुक्ती भी करे और उन्हें हटाने का भी काम करे.

वरिष्ठ भाजपा नेता ने सरकार के ऊपर सीबीआई के दुरूपयोग का आरोप ज़ोरदार ढंग से लगाया. उन्होंने कहा "यह कांग्रेस कौन सी दूध की गंगा है जिसमें जब तक डुबकी लगाते रहो तब तक साफ़ सुथरे लेकिन जैसे ही निकलो भ्रष्ट बन जाएं और सीबीआई के शिकार बन जाएं."

सीबीआई के भ्रष्टाचार निरोधक हिस्से को लोकपाल बिल के मातहत करने के सुझाव पर सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा उसका समर्थन करती है.

सांसदों के संसद के भीतर के आचरण को लेकर स्वराज ने कहा कि लोकपाल बिल के दायरे में नहीं लाना चाहिए लेकिन बाहर के आचरण को लोकपाल बिल में ना लाना गलत होगा.

लोकपाल के चुनाव को लेकर उन्होंने याद दिलाया की किस तरह से सीवीसी के नियुक्ति के मामले में उन्हें किस तरह से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने उन्हें दरकिनार कर गलत ढंग से सीवीसी की नियुक्ति कर दी. स्वराज ने कहा कि लोकपाल के चुनाव की चयन समिति में सरकार के सदस्यों की संख्या कम होना चाहिए.

तीनों मुद्दों पर सहमत

विपक्ष की नेता ने कहा राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति को भी लोकपाल के दायरे में लाना संभव है. केंद्रीय लोकपाल बिल उदाहरण के तौर पर काम कर सकता है.

इसी तरह सिटीज़न्स चार्टर के मामले में भाजपा शासित राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि उसे केंद्र में रखकर 'लोकसेवा प्रदाय गारंटी विधेयक' बनाया जा सकता है. इससे लोगों के काम जल्दी होने में मदद मिलेगी.

निचले स्तर के सरकारी अधिकारियों को लोकपाल के भीतर लाने के बारे में स्वराज ने कहा कि लोग छोटे भ्रष्टाचार से बचना चाहते हैं. उनका मानना था कि लोकपाल लोगों के इस मर्ज़ का इलाज होगा.

स्वराज ने सुझाव दिया कि लोकपाल के नीचे छोटे 11 लोकपाल बनाये जा सकते हैं. उनका कहना था कि उनकी पार्टी इस बात से सहमत है की छोटे स्तर के सरकारी अधिकारी लोकपाल के दायरे में आयें.

इससे पहले उन्होंने लोकपाल विधेयक पर सरकार के रवैया पर चर्चा की और शून्य काल में राहुल गांधी के दिए गए भाषण की निंदा की.

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