हरेन हत्याकांड: हत्या का अभियोग हटा

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Image caption हरेन पंडया की ह्त्या मार्च 2003 में हुई थी

गुजरात उच्च न्यायालय ने गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री हरेन पंडया के क़त्ल के मामले में सभी 12 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या का अभियोग हटा दिया है. हालांकि उनके ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास और साज़िश का मुक़दमा जारी रहेगा.

विशेष सरकारी वकील जेएम पंछाल ने कहा कि इसका मतलब हुआ कि अदालत ने हत्या के अभियुक्तों की अपील को आंशिक रूप से मान लिया है.

मामले की सुनवाई करते हुए दो जजों की खंडपीठ ने कहा कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) की छानबीन जैसे - 'आंख पर पट्टी बांध कर की गई है.'

सीबीआई की निंदा करते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह की कमियों के लिए जांच अधिकारी को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, जिसकी वजह से न्याय नहीं हो पाता और सरकारी धन की बर्बादी होती है.

उच्च न्यायालय ने कहा कि वो निचली अदालत के फ़ैसले को इसीलिए नही मान रहा क्योंकि जांच एजेंसी हत्या का मामला साबित नहीं कर पाई.

निचली अदालत ने अभियुक्तों को हत्या और साज़िश का दोषी पाया था.

कम सज़ा

सरकारी वकील का कहना था कि हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद मुख्य अभियुक्त के छोड़कर बाक़ी अभियुक्तों की सज़ा कम कर दी जाएगी.

हरेन पंडया की हत्या मार्च 2003 में तब हुई थी जब वो सुबह टहलने गए हुए थे.

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि उनका क़त्ल साल 2002 के मुस्लिम विरोधी दंगों का बदला लेने के लिए गया था.

आतंकवाद निरोधक क़ानून (पोटा) की विशेष अदालत ने मामले में गिरफ़्तार किए गए 15 लोगों में से 12 को सज़ा सुनाई थी.

अदालत ने नौ लोगों को उम्र क़ैद, दो को सात-सात साल और एक अभियुक्त को पांच साल की कै़द की सज़ा सुनाई थी.

उसने आदेश दिया था कि मुख्य अभियुक्त असग़र अली सारी उम्र जेल में रहेंगे.

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