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राजीव गांधी के हत्यारों का मामला हाई कोर्ट में

राजीव गांधी

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषी पाए गए अभियुक्तों की समीक्षा याचिका की सुनवाई आज मद्रास हाई कोर्ट करेगी.

मुरुगन, संथन और पेरारिवलन को फांसी की सज़ा सुनाई गई है जिसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है और इन तीनों को नौ सितंबर को फांसी होनी है.

इनमें से एक की बच्ची ने तमिलानाडु की मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर माफी देने की अपील की थी जिसके बाद हाई कोर्ट में समीक्षा याचिका भी दायर की गई है.

इस बीच तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रमुक के प्रमुख एम करुणानिधि ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषी ठहराए गए लोगों की मौत की सज़ा रद्द करने की अपील की है.

करुणानिधि का कहना है कि अगर इन लोगों की मौत की सज़ा रद्द कर दी जाती है, तो तमिल लोग ख़ुश होंगे.

चेन्नई से जारी एक बयान में करुणानिधि ने कहा है- इन लोगों ने क़रीब 20 वर्ष का समय जेल में काट लिया है, जो आजीवन कारावास से ज़्यादा है. मौत की सज़ा अब रद्द कर देनी चाहिए. अगर ऐसा होता है तो पूरा तमिल समुदाय इस मानवीय कार्य की सराहना करेगा और ख़ुश होगा.

करुणानिधि ने कहा कि वे केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे इन तीन युवकों को मौत के मुँह से बचाएँ.

उन्होंने यहाँ तक कहा कि अगर राजीव गांधी ज़िंदा होते, तो वे इन तीनों की जान बचाने के लिए निश्चित रूप से आगे आते.

'अधिकार नहीं'

इस बीच तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने कहा है कि उनके पास राष्ट्रपति के आदेश को बदलने का अधिकार नहीं है. राष्ट्रपति ने तीनों दोषियों की क्षमादान याचिका को ठुकरा दिया था.

मुरुगन, संथन और पेरारिवलन को नौ सितंबर को फाँसी होनी है. 21 मई 1991 को राजीव गांधी की एक आत्मघाती बम धमाके में मौत हो गई थी.

दूसरी ओर मुरुगन, संथन और पेरारिवलन ने अपनी मौत की सज़ा पर अंतरिम रोक लगाने के लिए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.

अदालत मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करेगी. इन लोगों ने अपनी याचिका में मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की है और कहा है कि उनकी क्षमा याचिका में बहुत देरी की गई.

ग्यारह साल बाद राष्ट्रपति ने इस 12 अगस्त को उनकी क्षमा याचिका को रद्द कर दिया था.

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