खेल विधेयक को कैबिनेट की मंज़ूरी नहीं

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Image caption अजय माकन से अब फिर से विधेयक तैयार करने के लिए कहा गया है

भारत में खेल की प्रशासकीय संस्थाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लाए जा रहे नए खेल विधेयक को मंत्रिमंडल ने फ़िलहाल स्वीकृति नहीं दी है.

इसमें खेल मंत्रालय ने क्रिकेट के दुनिया के सबसे बड़े बोर्ड भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड यानी बीसीसीआई पर भी लगाम कसने की तैयारी की थी. अब खेल मंत्री अजय माकन को विधेयक फिर से तैयार करने के लिए कहा गया है.

यहाँ रोचक बात ये है कि जिस मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को स्वीकृति देने से इनकार किया है उसमें पाँच ऐसे सदस्य हैं जो किसी न किसी खेल संगठन के प्रमुख हैं और बीसीसीआई इस विधेयक के ज़रिए सूचना के अधिकार के दायरे में आने को राज़ी नहीं है.

मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल हुए शरद पवार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष हैं, विलासराव देशमुख मुंबई क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं, सीपी जोशी राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं, प्रफ़ुल्ल पटेल के पास अखिल भारतीय फ़ुटबॉल महासंघ की कमान है और फ़ारुक़ अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं.

Image caption मंत्रिमंडल में शामिल शरद पवार आईसीसी के अध्यक्ष भी हैं और बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष

इस विधेयक का विरोध करने वालों का तर्क है कि इससे खेल संगठनों की स्वायत्तता प्रभावित होगी जबकि खेल मंत्रालय का कहना है कि इसके ज़रिए वह खेल संगठनों में पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रहा है.

खेल मंत्री अजय माकन चाहते थे कि राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक 2011 संसद के इसी सत्र में पेश हो जाए मगर फ़िलहाल उसकी संभावना क्षीण हो गई है.

इस विधेयक के ज़रिए ये कोशिश की गई है कि खेल संस्थाओं के प्रशासक 70 साल की आयु से ज़्यादा समय तक पद पर न रहे और न ही उनका कार्यकाल दो बार से ज़्यादा का हो.

साथ ही विधेयक में बीसीसीआई की आर्थिक जवाबदेही तय करने की कोशिश की गई है और इसीलिए उसे सूचना के अधिकार के दायरे में लाने की योजना थी मगर बीसीसीआई ने खुले तौर पर कहा कि उन्हें सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती इसलिए वे इस विधेयक के ख़िलाफ़ हैं.

माना जा रहा है कि कैबिनेट में इस विधेयक को समर्थन नहीं मिलने से एक तरह से बीसीसीआई की ही जीत हुई है.

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