संसदीय समिति से अलग हुए मनीष तिवारी

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Image caption मनीष तिवारी ने समिति से अलग होने का फ़ैसला किया

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के विरुद्ध भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले और फिर उस टिप्पणी पर माफ़ी माँगने वाले कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने लोकपाल विधेयक पर चर्चा करने वाली संसद की स्थाई समिति से अलग होने का फ़ैसला किया है.

स्थाई समिति का मौजूदा कार्यकाल बुधवार को समाप्त हो रहा है और तिवारी ने अगले कार्यकाल में इसमें शामिल नहीं होने का फ़ैसला किया.

उन्होंने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा, "क़ानून और न्याय मामलों की स्थाई समिति में मेरी मौजूदगी पर कुछ लोगों की आपत्ति से जुड़ी रिपोर्टें प्रेस में आई हैं. मैं दोहराना चाहता हूँ कि मैं एक मज़बूत और प्रभावी लोकपाल विधेयक चाहता हूँ."

मगर तिवारी ने कहा कि वह इस मामले में कोई विवाद खड़ा करना नहीं चाहते, "मैं किसी तरह का विवाद खड़ा नहीं करना चाहता जिसकी छाया भी इतने अहम विधेयक की चर्चाओं पर पड़े. इसलिए मैंने ख़ुद को इस समिति से अलग करने का फ़ैसला किया है."

लोकपाल विधेयक के सरकारी प्रस्ताव का विरोध कर रहे अन्ना हज़ारे के अनशन शुरू होने से कुछ ही दिन पहले तिवारी ने हज़ारे पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था जिसकी ख़ुद उनकी ही पार्टी में भी आलोचना हुई थी.

हज़ारे के अनशन के दौरान अधिकतर समय तिवारी मीडिया से दूर ही रहे और जब सामने आए भी तो उन्होंने हज़ारे के विरुद्ध दिए उस बयान पर अफ़सोस जताया था.

अन्य नामों पर अटकलें

लोकपाल विधेयक क़ानून और न्याय मामलों की स्थाई समिति के सामने है जिसके प्रमुख कांग्रेस के राज्य सभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी हैं. इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्य सभा के 10 सांसद हैं.

अब नई समिति का गठन होगा जिसमें तिवारी के नहीं होने की सूरत में कांग्रेस कोई नया नाम प्रस्तावित करेगी.

इस समिति में शामिल अन्य प्रमुख नेताओं में राम विलास पासवान, अमर सिंह, लालू प्रसाद, मीनाक्षी नटराजन और राम जेठमलानी हैं.

विभिन्न पार्टियाँ इस समिति में अपने सदस्यों का नाम प्रस्तावित करती हैं ऐसे में माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ चुके अमर सिंह की जगह अब पार्टी कोई नया नेता भेजेगी.

इसी तरह से चर्चा इस बात की भी है कि लालू प्रसाद ख़ुद इस समिति में रहना चाहेंगे या पार्टी से किसी दूसरे नेता को अधिकृत करेंगे.

मनीष तिवारी के इस तरह समिति से अलग होने के फ़ैसले से अन्ना हज़ारे की टीम ज़रूर ख़ुश होगी क्योंकि वे तिवारी की मौजूदगी से असहज थे.

माना जा रहा है कि कांग्रेस अभिषेक मनु सिंघवी को ही इस समिति के अध्यक्ष के रूप में बरक़रार रखेगी.

तिवारी के अलग होने के फ़ैसले पर उन्होंने कहा, "स्थाई समितियों का गठन एक साल के बाद फिर से होता है और इसमें अध्यक्ष कौन होगा या सदस्य कौन होगा ये आम तौर पर राजनीतिक दल तय करते हैं. इसलिए मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है और न ही मैं इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में हूँ."

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