घर पहुंचे अन्ना

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बारह दिनों तक आमरण अनशन करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे अस्पताल से छुट्टी पाकर अपने गाँव रालेगन सिद्धि पहुँच चुके हैं.

महाराष्ट्र के इस गाँव के लोगों ने जश्न मनाकर और मिठाई बांटकर अन्ना का स्वागत किया.

जन लोकपाल बिल के मसले पर आमरण अनशन पर बैठने के बाद अन्ना हज़ारे चार दिनों तक गुडगाँव के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे.

संसद ने लोकपाल विधेयक से जुड़ी अन्ना हज़ारे की तीन अहम माँगें मानते हुए आम सहमति से एक प्रस्ताव लोकपाल पर विचार कर रही स्थाई समिति के पास भेज दिया था और उसी के बाद अन्ना हज़ारे ने अनशन तोड़ा था.

इस दौरान हज़ारे का वज़न सात किलो से ज़्यादा कम हो गया था और उनकी सेहत पर नज़र रख रहे डॉक्टर नरेश त्रेहन ने उस समय हज़ारे की तबीयत पर चिंता भी व्यक्त की थी.

उसी के बाद जब अन्ना हज़ारे ने रविवार को अनशन तोड़ा था तो वहाँ से उन्हें सीधे अस्पताल ले जाया गया था.

बढ़ती लोकप्रियता

भ्रष्टाचार के खिलाफ़ छेड़ी गई अपनी मुहिम के बाद से अन्ना हज़ारे भारत के कई हिस्सों में अत्याधिक लोकप्रिय हो गए हैं और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें अपने यहाँ आकर अपने-अपने मुद्दों से जुड़ने का न्योता दिया है.

उत्तर-पूर्वी मणिपुर में सुरक्षा बलों के दायरे को घटाने की मांग में करीब एक दशक से जुटी कार्यकर्ता इरोम शर्मीला ने भी अन्ना के मणिपुर में आने की बात कही है.

भारत में जहाँ आत्महत्या करना एक अपराध है, वहां इरोम शर्मीला कई सालों से नाक के सहारे पेय पदार्थ पीकर गुज़ारा कर रहीं हैं और उस क़ानून का विरोध कर रही हैं जिसमे सुरक्षा बलों को अत्याधिक अधिकार मिले हैं.

इम्फाल में इरोम शर्मीला ने पत्रकारों से कहा, "अगर अन्ना हमारे बीच आ जाते हैं तो हमारे आंदोलन को बहुत बल मिलेगा."

उधर श्रीनगर में अलगाववादी नेता मीरवैज़ उमर फ़ारूक़ ने अन्ना हज़ारे से अनुरोध किया है कि वे कश्मीर में पहुंचकर लोगों की दिक्कतों को देखे और परखे.

फ़ारूक़ ने ये भी कहा है कि कथित रूप से बरामद हुई सामूहिक कब्रों के मामले में भी अन्ना का न्यायसंगत समर्थन मिलना चाहिए.

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