खाद्य पदार्थों की महँगाई दहाई अंकों में

इमेज कॉपीरइट Reuters

बीस अगस्त को समाप्त हुए हफ़्ते में भारत की खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 10.05 प्रतिशत हो गई है जो कि पिछले पांच महीने में सबसे ज़्यादा है.

प्याज़, फल, सब्ज़ियों और प्रोटीनयुक्त पदार्थों के महंगे होने की वजह से खाद्य मुद्रास्फीति की दर में बढ़ोतरी हुई है.

थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर तय की जाने वाली खाद्य पदार्थों की महंगाई दर इससे पहले के हफ़्ते में 9.80 प्रतिशत थी.

पिछले साल इसी अवधि के दौरान खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.

12 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के बाद ये पहला मौक़ा है जब खाद्य मुद्रास्फीति की दर दहाई अंकों में पहुंच गई है.

फल-सब्ज़ियों के दाम बढ़े

गुरुवार को जारी किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल के मुक़ाबले प्याज़ के दाम में 57.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि आलू की क़ीमत 13.31 फ़ीसदी बढ़ी है.

इसी अवधि में फलों के दाम में 21.58 फ़ीसदी और सब्ज़ियों के दाम में 15,78 फ़ीसदी की सालाना बढ़ोतरी हुई है.

गुरुवार को सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक़ 20 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में ईंधन मूल्य सूचकांक भी बढ़कर 12.55 फ़ीसदी हो गया है.

इससे पहले के हफ़्ते में खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति की दर क्रमश: 9.80 और 13.13 प्रतिशत थी.

मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए भारत के रिज़र्व बैंक ने मार्च 2010 से अब तक 11 बार ब्याज दर बढ़ाई है जो कि जुलाई महीने में 9.22 फ़ीसदी थी.

रिज़र्व बैंक को उम्मीद है कि नवंबर-दिसंबर तक महंगाई की दर में थोड़ी कमी आएगी.

बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने पिछले हफ़्ते ही कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि मांग में थोड़ी कमी आने से महंगाई नियंत्रित हो सकेगी.

संबंधित समाचार