मारुति में कर्मचारियों के लिए शर्त

Image caption मारुति के मानेसर प्लांट के कर्मचारियों के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ.

भारत में कार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटिड के हरियाणा स्थित मानेसर प्लांट में कंपनी ने कर्मचारियों के काम करने पर एक शर्त लगा दी है जिसके विरोध में हरियाणा की कई यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन किया है.

कर्मचारियों से एक लिखित आश्वासन पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है. मारुति प्रबंधन के मुताबिक आश्वासन में सभी कर्मचारियों से अनुशासन से काम करने, अपनी किसी भी मांग के लिए काम की रफ़्तार कम ना करने और हड़ताल ना करने की बात कही गई है.

मारुति के कर्मचारियों का कहना है कि ये सरासर तानाशाही है और उन्हें ये मंज़ूर नहीं.

वहां काम करने वाले सोनू कहते हैं, “सोमवार को जब हम काम करने आए तो प्लांट के बाहर सैंकड़ों पुलिसकर्मी तैनात थे और ये नोटिस लगा था, चार दिन बाद, अब भी यहां पुलिस की तैनाती है, हम तो काम करना चाहते हैं पर इस आश्वासन का क्या मतलब है.”

हालांकि कर्मचारी मारुति प्रबंधन से बातचीत कर ये मामला सुलझाना चाहते हैं, लेकिन प्रबंधन किसी तरह की बातचीत के पक्ष में नहीं है.

अब हरियाणा की कई मज़दूर यूनियनों ने मारुति के कर्मचारियों को अपना समर्थन जताया. यूनियनों के सैंकड़ों लोग मानेसर प्लांट के आगे जुटे तो वहीं कुछ लोग जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए.

ऑल इंडिया सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स के दिल्ली महासचिव संतोष राय ने बीबीसी से कहा, “इस तरह की शर्त रखना एकदम ग़ैरक़ानूनी है और मज़दूरों के हड़ताल करने के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन है.”

मारुति के मानेसर प्लांट प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों के सामने ये शर्त सोमवार को रखी थी.

बातचीत नहीं करेंगे

मारुति में कॉरपोरेट सर्विसिस के जेनरल मैनेजर कंवल दीप सिंह ने बीबीसी को बताया कि मज़दूरों के अपने कामकाज में लापरवाही करने के कई मामले सामने आने पर ये कदम उन्हें मजबूरी में उठाना पड़ा.

मारुति प्रबंधन के मुताबिक मज़दूरों से ऐसा लिखित आश्वासन लेना क़ानून के दायरे में है और प्रदेश के श्रम नियमों के तहत आता है.

कंवल दीप सिंह ने कहा, “जून में हुई हड़ताल के बाद से हमने देखा कि मज़दूर कामचोरी कर रहे थे, जब समझाने के बावजूद ये चलन नहीं रुका, तो सोमवार को हमने 21 कर्मचारियों के ख़िलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की और सभी से ये लिखित आश्वासन मांगा.”

मारुति प्रबंधन के मुताबिक पिछले चार दिनों में 950 कर्मचारियों में से अब तक सिर्फ़ 40 ने इसपर हस्ताक्षर किए हैं, इसके बावजूद वो उनसे किसी तरह की मध्यस्थता नहीं करना चाहते.

मारुति के मानेसर प्लांट में मारुति स्विफ़्ट, ए-स्टार और एसएक्स-4 का निर्माण किया जाता है.

सोमवार और मंगलवार को यहां कोई काम नहीं हुआ लेकिन बुधवार तक मारुति ने कुछ प्रशिक्षित कर्मचारियों को ठेके पर और कुछ अन्य को गुड़गांव में अपने और प्लांट्स से बुलाकर काम दोबारा शुरू कर लिया.

इसी वर्ष जून में मारुति के इसी प्लांट के कर्मचारी तेरह दिन तक हड़ताल पर रहे थे. वे एक नए कर्मचारी संगठन को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे.

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हूड्डा की पहल पर प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों में आखिरकार समझौता हुआ था जिसके तहत मारुति सुज़ुकी प्रबंधन ने निकाले गए 11 कर्मचारियों को फिर बहाल करने का फ़ैसला किया (हालांकि उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक जाँच शुरू की गई) और कर्मचारी संगठनों ने अलग यूनियन बनाने की मांग छोड़ दी.

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