छह मंत्रियों ने नहीं दिया संपत्ति का ब्यौरा

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भष्टाचार के आरोप झेल रही मनमोहन सिंह की सरकार के मंत्रियों की संपत्ति का सालाना ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया गया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर जारी किए गए इस ब्योरे के मुताबिक मनमोहन सिंह 1996 मॉडल की एक मारुति 800 कार के मालिक है.

लेकिन प्रधानमंत्री के निर्देश के बावजूद मंत्रिमंडल के छह सदस्यों ने अपने बारे में जानकारी उपलब्ध नही कराई है.

इनमें अन्ना हजारे का अनशन खत्म कराने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले विलासराव देशमुख, राहुल गांधी के करीबी भंवर जितेंद्र सिंह, कृष्णा तीरथ, जयंती नटराजन, एस जगतरक्षकन और नमोनारायण मीणा जैसे मंत्री शामिल है.

प्रधानमंत्री की संपत्ति

कार के नाम पर मनमोहन सिंह के पास सिर्फ पुरानी मारुति-800 कार, चंडीगढ़ में दो और दिल्ली में एक घर है. उनके पास पंद्रह हजार रुपये ही नकद है. अलग-अलग बैंकों में उनकी जमापूंजी लगभग 26 लाख रूपए है.

पत्नी गुरशरण कौर के पास 2.75 लाख के सोने के आभूषण हैं. दूसरे कई मंत्रियों की तरह देश के प्रधानमंत्री के नाम खेती की कोई जमीन नहीं है. जबकि, मंत्रिमंडल में उनके कई सहयोगी कई हजार एकड़ कृषि भूमि के मालिक हैं.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने पास फोर्ड आइकॉन कार होने की जानकारी दी है. दिल्ली के मुनिरका और कोलकाता में भी उनके पास एक फ्लैट है. पैतृक कृषि ज़मीन और मकान में उनका अच्छा खासा हिस्सा है.

गृहमंत्री पी चिदंबरम के पास फॉक्सवैगन समेत तीन कारें हैं. उनकी अचल और चल संपत्ति की कुल कीमत 11.16 करोड़ रुपये है.

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के पास टोयोटा कोरोला सहित चार गाड़ियां हैं. सिब्बल के देश के कई शहरों में फ्लैट और खेतीयोग्य जमीन है.

भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम मंत्री प्रफुल्ल पटेल के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति है. लेकिन उनके पास कौन सी गाड़ी है पता नही.

रक्षा मंत्री एके एंटनी के पास न तो कोई घर है और न कार. कामकाजी पत्नी के पास एक कार है, पत्नी के पास पंद्रह लाख का एक घर केरल में है और इतनी ही कीमत का एक प्लॉट उनके पास है.

करोड़ों की संपत्ति

कृषि मंत्री शरद पवार की कुल अचल संपत्ति साढ़े तीन करोड़ की है तो उनकी पत्नी की अचल संपत्ति की कुल कीमत एक करोड़ के आस पास है.

प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के सदस्य हर साल अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करते हैं.

सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों और विवादों से घिरे होने के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल से कहा था कि वो 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा प्रधानमंत्री कार्यालय को उपल्बध कराएं .

प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से न सिर्फ अपना बल्कि अपने परिवार की संपत्ति का ब्यौरा भी जारी करने को कहा था.

साथ ही प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को नसीहत दी कि वो और उनके सगे-संबंधी के ऐसे किसी भी व्यापार से दूर रहें जिसमें सरकार या सरकारी विभाग उनके साझीदार हों.

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले फरवरी 2010 में ये दिशा-निर्देश जारी किए थे और मंत्रियों को सितंबर 2010 तक इस पर अमल करना था.

ग़ौरतलब है कि भ्रष्टाचार और बाबा रामदेव के अनशन से जुड़े विवाद को लेकर सफाई देते हुए हाल ही में प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर चिंतित है और उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर गंभीर भी है, लेकिन 'सरकार के पास कोई जादू की छड़ी नहीं.'

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