'कश्मीरी अलगाववादी थे चुनाव के लिए तैयार'

कश्मीर चुनाव

ख़ुफ़िया मामलों की जानकारी देने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के ताज़ा दस्तावेज़ों के मुताबिक़ भारत-प्रशासित कश्मीर का पृथकतावादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेस राज्य में होने वाले चुनाव में शामिल होना चाहता था.

दस्तावेज़ों के मुताबिक़ साल 2007 में अमरीकी राजनयिकों से दिल्ली में एक मुलाक़ात के दौरान हुर्रियत कांफ्रेस के उदारवादी धड़े के नेताओं ने चुनाव में शिरकत पर रज़ामंदी ज़ाहिर की थी और कहा था कि भारत इसके बदले में अहम राजनीतिक रियायतों का एलान करे.

अब तक चुनावों को 'दिखावा' बतानेवाले और उनका बहिष्कार करने वाले हुर्रियत कांफ्रेस से संबंधित ये रहस्योदघाटन उन ढाई लाख राजनयिक संदेशों का हिस्सा हैं जो विकीलीक्स ने शुक्रवार को प्रकाशित किए हैं.

गिलानी तो कट्टरपंथी ख़्यालात के हैं वो नहीं मानेगें. शब्बीर शाह हाशिए पर हैं. लेकिन यासीन मलिक से हम बात करेंगे, वो अगर चुनाव न लड़े तो कम से कम खुले आम उसका विरोध न करने का वादा ज़रूर करे.

बिलाल लोन, कश्मीरी अलगाववादी नेता

श्रीनगर में बीबीसी के संवाददाता रियाज़ मसरूर के मुताबिक़ हुर्रियत कांफ्रेस ने इसे 'आधा सच' और 'आधा झूठ' क़रार दिया है और कहा है कि भारत प्रशासन के तहत कोई भी चुनाव जम्मू-कश्मीर में भारतीय क़ब्ज़े को सही ठहराने का होता है.

लेन-देन

फ़रवरी 2007 में दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास से भेजे गए संदेश में राजूदत मलफोर्ड की हुर्रियत नेता बिलाल ग़नी लोन से मुलाक़ात के ज़िक्र के हवाले से कहा गया है कि हुर्रियत का ये धड़ा चुनाव के लिए तैयार है लेकिन चाहता है कि भारत पहले कुछ सियासी रियायतों का एलान करे.

बिलाल लोन लगभग आठ साल पहले क़त्ल कर दिए गए पृथकतावादी नेता अब्दुल ग़नी लोन के बेटे हैं. उनके छोटे भाई सज्जाद ग़नी लोन ने सांसद का चुनाव लड़ा था लेकिन वो जीत नहीं पाए.

संदेश में कहा गया है कि बिलाल अलगाववादियों के सभी धड़ों को एक मंच पर लाना चाहते हैं.

संदेश में बिलाल कहते हैं, "गिलानी तो कट्टरपंथी ख़्यालात के हैं वो नहीं मानेगें. शब्बीर शाह हाशिए पर हैं. लेकिन यासीन मलिक से हम बात करेंगे, वो अगर चुनाव न लड़े तो कम से कम खुले आम उसका विरोध न करने का वादा ज़रूर करे."

चुनाव तो प्रजातांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है और हम उसके ख़िलाफ़ नहीं हैं लेकिन कश्मीर एक हथियाया हुआ इलाक़ा है. यहां भारत की देख-रेख में जो चुनाव होते हैं वो उस क़ब्ज़े पर मुहर लगवाने के लिए करवाए जाते हैं.

मीरवायज़ उमर फ़ारूक़, अध्यक्ष, हुर्रियत कांफ्रेस

बिलाल ग़नी लोन का कहना है कि ये सब 'आधा सच' और 'आधा झूठ' है. "मैंने कुछ बातें ज़रूर कही होंगी लेकिन मैने हरगिज़ ऐसा नहीं कहा कि हम लोग चुनाव लडेंगे."

हुर्रियत कांफ्रेस के अध्यक्ष मीरवायज़ उमर फ़ारूक़ ने बीबीसी से कहा, "चुनाव तो प्रजातांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है और हम उसके ख़िलाफ़ नहीं हैं लेकिन कश्मीर एक हथियाया हुआ इलाक़ा है. यहां भारत की देख-रेख में जो चुनाव होते हैं वो उस क़ब्ज़े पर मुहर लगवाने के लिए करवाए जाते हैं."

विकीलीक्स पर प्रकाशित दस्तावेज़ में उस संदेश का भी ज़िक्र है जिसमें नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी इलाक़े में हथियारबंद ग्रुपों के दोबारा इकट्ठा होने की बात कही गई है और अंदेशा जताया गया है कि उनकी किसी क़िस्म की कार्रवाई का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ेगा.

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