भ्रष्टाचार की गुंजलक में फँसी बीजेपी

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बीजेपी नेता जनार्दन रेड्डी और उनकी विवादास्पद खदानों के एक अधिकारी की गिरफ़्तारी से भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर असमंजस में फँस गई दिखती है.

कर्नाटक की राजनीतिक मजबूरी उसे ताक़तवर रेड्डी बंधुओं को पूरी तरह मंझधार में छोड़ने से रोकती है तो देश भर में भ्रष्टाचार विरोधी माहौल को देखते हुए बीजेपी भ्रष्ट नेताओं की तरफ़दारी करने वाली पार्टी नज़र नहीं आना चाहती.

यही कारण है कि जनार्दन रेड्डी की गिरफ़्तारी के बाद भी पार्टी रेड्डी बंधुओं का समर्थन करती दिखती है.

दरअसल लाखों करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कमज़ोर नज़र आ रही मनमोहन सिंह सरकार पर तगड़ा हमला बोलने की बजाए भारतीय जनता पार्टी शर्माई-सकुचाई ज़्यादा दिखती है.

अगले साल उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए पार्टी को इस मुद्दे पर सड़कों पर होना चाहिए था, लेकिन अपने पिछवाड़े से गड़े मुर्दों के उखाड़े जाने का डर उसे इस मुद्दे पर बहुत उग्र रुख़ अपनाने से रोके हुए है.

दुविधा

इसी असमंजस से बीजेपी तब भी गुज़रती नज़र आई जब दिल्ली शहर में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में शरीक़ होने के लिए हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के वरिष्ठ पत्रकार शेखर अय्यर कहते हैं कि, "पार्टी की ये स्थिति थी कि बीजेपी के यशवंत सिन्हा जैसे वरिष्ठ नेता से लेकर वरुण गाँधी और उदय सिंह जैसे जूनियर सांसदों तक को अफ़सोस से कहना पड़ा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी ने ज़्यादा कड़ा रुख़ नहीं अपनाया".

वो कहते हैं कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को पद से हटाकर पार्टी ने कुछ हद तक काँग्रेस की ओर से लगातार हो रहे हमलों से ख़ुद का बचाव किया है.

क्योंकि उससे पहले जब भी भारतीय जनता पार्टी मोबाइल कंपनियों को बांटे गए लाइसेंसों में हुए कथित घपलों जैसे मामलों को उठाती थी तो काँग्रेस, कर्नाटक बीजेपी में भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देकर पलटवार करती थी.

यही कारण है कि अवैध खनन के आरोपों में घिरे बीजेपी नेता, रेड्डी बंधुओं के नज़दीकी मंत्री रामुलू ने, कल अपने पद इस्तीफ़ा दे दिया. ये संकेत हैं कि भारतीय जनता पार्टी अपनी छवि बदलना चाह रही है.

दो शिकार?

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Image caption कच्चे लोहे की खदानें दुनिया में हर जगह मोटा मुनाफ़ा देती हैं.

लेकिन जनार्दन रेड्डी की गिरफ़्तारी के पीछे काँग्रेस की राजनीति भी साफ़ साफ़ दिखती है.

जानकार कहते हैं कि यूपीए सरकार कर्नाटक नहीं बल्कि आँध्र प्रदेश की राजनीति को ध्यान में रखकर रेड्डी बंधुओं के ख़िलाफ़ सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है.

हाल ही में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने काँग्रेस से अलग हुए सांसद जगनमोहन रेड्डी के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए हैं.

इसके बाद काँग्रेस को ये डर है कि जगनमोहन अपनी धन दौलत का इस्तेमाल करके कहीं आँध्र प्रदेश में उसकी सरकार को गिरा न दे.

सच ये भी है कि बेल्लारी की अवैध खदान चलाने के आरोप झेल रहे रेड्डी बंधु, जगनमोहन रेड्डी के पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी के बहुत नज़दीकी थे.

काँग्रेस जगन मोहन रेड्डी के साथ साथ कर्नाटक के रेड्डी बंधुओं के ख़िलाफ़ सीबीआई कार्रवाई करके एक तीर से दो शिकार कर रही है.

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