सेन पर लोकसभा में महाभियोग नहीं

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लोकसभा में चर्चा से पहले ही इस्तीफ़ा दे देने की वजह से जस्टिस सौमित्र सेन के ख़िलाफ़ अब महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होगी.

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी, क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल के बीच हुई बैठक के बाद ये फ़ैसला किया गया है.

इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ने सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं से इस विषय पर विचार विमर्श किया था.

उल्लेखनीय है कि 1983 के एक मामले में सौमित्र सेन पर 33.23 लाख रुपयों की हेराफ़ेरी करने का आरोप था और इस मामले पर बहस के बाद राज्यसभा ने बहुमत से उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट में न्यायाधीश के पद से हटाने का फ़ैसला किया था.

इस पर सोमवार को लोकसभा में बहस होनी थी लेकिन इससे पहले ही जस्टिस सौमित्र सेन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था जिसे राष्ट्रपति ने शनिवार को स्वीकार भी कर लिया था और सरकार ने रविवार को इसे अधिसूचित भी किया था.

एक वरिष्ठ मंत्री के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है, "जस्टिस सेन के इस्तीफ़े के बाद ये प्रक्रिया ही निष्प्रभावी हो गई है इसलिए अब लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होगी."

असमंजस

इससे पहले इस बात पर असमंजस बना हुआ था कि जस्टिस सेन के इस्तीफ़े के बाद महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा होगी या नहीं.

एटॉर्नी जनरल ने सरकार को अपनी राय दी थी कि जस्टिस सेन ने चाहे इस्तीफ़ा दे दिया हो लेकिन महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा होनी चाहिए और इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए क्योंकि ये राज्यसभा में हो चुका है.

एक विवाद ये भी था कि जस्टिस सेन ने अपना इस्तीफ़ा फ़ैक्स के ज़रिए भेजा था. तब कहा जा रहा था कि तकनीकी कारणों से इसे स्वीकार नहीं किया जा सकेगा.

लेकिन शनिवार को उन्होंने हस्तलिखित इस्तीफ़ा राष्ट्रपति को भिजवा दिया था और इसकी प्रति लोकसभा अध्यक्ष को भिजवा दी गई थी.

इससे महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया को रद्द करने का रास्ता साफ़ हो गया था.

राज्यसभा में प्रस्ताव

न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया टेलीविज़न पर लाइव प्रसारित हुई थी जिसमें पहले सौमित्र सेन को अपना पक्ष रखना पड़ा और उसके बाद उस पर बहस हुई थी.

राज्यसभा में गत 18 अगस्त को हुई वोटिंग के दौरान सौमित्र के पक्ष में मात्र 17 वोट पड़े थे जबकि 189 सांसदों ने उनके ख़िलाफ़ वोट डाला था.

सौमित्र सेन ने संसद में अपने बयान में खुद को निर्दोष बताया था और वोटिंग के बाद एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा था कि वो आगे लड़ाई लड़ेंगे.

जस्टिस सेन के ख़िलाफ़ उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की अध्यक्षता गठित एक समिति ने जांच की थी और आरोपों को सही पाया था. उन पर 1983 के एक मामले में 33.23 लाख रुपयों की हेराफेरी करने का आरोप था.

ये पैसे उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट की तरफ से एक मामले में रिसीवर नियुक्त किए जाने के बाद दिए गए थे. उस समय सौमित्र सेन वकील हुआ करते थे.

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