पेश हुआ भूमि अधिग्रहण बिल

सिंचित भूमि

मसौदे के अनुसार बहु-फ़सली सिंचित भूमि का अधिग्रहण अंतिम विकल्प होगा

भारत सरकार ने आज लोकसभा में भूमि अधिग्रहण विधेयक पेश किया है जिसके तहत लोगों के लिए मुआवज़े की पर्याप्त व्यवस्था की गई है.

नए विधेयक पर अभी बहस बाकी है और इसको लेकर अलग अलग गुटों की राय भी बंटी हुई है. बुधवार को बिल लोकसभा में पेश किया गया लेकिन दिल्ली दमाकों के कारण गृहमंत्री के बयान के बाद लोकसभा स्थगित हो गई.

संभवत इस मसौदे पर गुरुवार को चर्चा होगी और इसे स्थायी समिति को भेजा जाएगा.

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने पुराने मसौदे में फेरबदल कर के नया और बहुप्रतीक्षित भूमि अधिग्रहण और पुर्नवास अधिनियम 2011 लोकसभा में पेश किया.

नए विधेयक के तहत प्रस्ताव रखा गया है कि जिस किसी इलाक़े में भूमि अधिग्रहण होगा उस इलाक़े के 80 प्रतिशत लोगों की रज़ामंदी ज़रुरी होगी और उन्हें बेहतर मुआवज़ा दिया जाएगा.

खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी ज़मीनों को आखिरी स्थिति में ही अधिगृहित किया जाएगा जिसमें कई फ़सलें होती हैं.’’

जयराम रमेश, ग्रामीण विकास मंत्री

जयराम रमेश का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के दौरान इसके आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों को ध्यान में रखने की ज़रुरत है और वो भी पारदर्शी तरीके से.

इस विधेयक को कई पक्षों से बातचीत के बाद तैयार किया गया है जिसमें कहा गया है कि जिस ज़मीन पर कई फ़सलें आती हों उसे आखिरी स्थिति में ही अधिगृहित किया जाए.

हालांकि पहले मसौदे में कहा गया था कि उन ज़मीनों को अधिगृहित नहीं किया जाएगा जिसमें कई फ़सलें होती हैं.

लेकिन नए विधेयक में कहा गया है कि ‘‘खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी ज़मीनों को आखिरी स्थिति में ही अधिगृहित किया जाएगा जिसमें कई फ़सलें होती हैं.’’

विधेयक के अनुसार अधिग्रहण और पुनर्वास के प्रस्ताव उन मामलों में भी लागू होंगे जहां निजी कंपनियां किसी प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन खरीद रही हों और ये ज़मीन शहरी इलाक़ों में 50 एकड़ से ज्यादा और ग्रामीण इलाक़ों में 100 एकड़ से अधिक हो.

रमेश का कहना था कि भूमि अधिग्रहण में सरकार की भूमिका सीमित रखने की कोशिश की गई है.

उनका कहना था कि किसी भी इलाक़े में भूमि अधिग्रहण के लिए वहां के 80 प्रतिशत लोगों की रज़ामंदी का नियम बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा.

विधेयक के अनुसार अगर किसी राज्य में भूमि, अधिग्रहण के बाद दस वर्षों तक इस्तेमाल न की जाए तो इस तरह की ज़मीनों से भूमि बैंक भी बनाया जाए ताकि बाद में किसी परियोजना के लिए ज़रुरत पड़ने पर यह जगह दी जा सके.

मॉनसून सत्र एक दिन बाद यानी आठ सितंबर को ख़त्म हो रहा है.

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