सभी दलों ने एक सुर में निंदा की

देश के सभी राजनीतिक दलों ने दिल्ली में उच्च न्यायालय के बाहर हुए विस्फोट की एक सुर में निंदा की है और कहा है कि दोषियों को किसी भी क़ीमत पर बख़्शा नहीं जाना चाहिए.

लाल कृष्ण आडवाणी- भारतीय जनता पार्टी

राजधानी दिल्ली में संसद के इतना निकट इस तरह की घटना हो जाए, निस्संदेह हम सब इसकी निंदा करते हैं और अपेक्षा करते हैं कि सरकार ने शीघ्रातिशीघ्र अपराधियों को खोज निकालने का जो आश्वासन दिया है ये ज़रूर पूरा होगा.

भारत की राजधानी में इस तरह की घटना फिर से हुई है ये निश्चित रूप से दुनिया के लिए अहम बात है कि फिर से एक बार भारत की राजधानी में इस तरह का आक्रमण हुआ है और ये हमारे लिए ज़रूर चिंता की बात है.

डी राजा- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

हम इस तरह की घटना की घोर निंदा करते हैं मगर साथ ही ये भी देखना चाहिए कि इस तरह की घटना बार-बार कैसे हो रही है. सरकार को गहन जाँच कराकर उसकी जानकारी सबको देनी चाहिए कि आख़िर ग़लती कहाँ हुई. क्या ये ख़ुफ़िया एजेंसियों की विफलता थी या ये सरकार की नीतियों की विफलता है. आख़िर हमारे ख़ुफ़िया तंत्र में क्या कमी है. ये सरकार को स्पष्टीकरण देना होगा.

सरकार को इसकी जाँच करानी चाहिए. दोषियों को बख़्शा नहीं जाना चाहिए और देश को आतंक से मुक्त होना चाहिए. मगर मुझे लगता है कि कहीं न कहीं सरकार की ये विफलता भी है और उसमें भी ख़ास तौर पर गृह मंत्रालय की क्योंकि देश के विभिन्न हिस्सों में बम विस्फोट हो ही रहे हैं.

मुलायम सिंह यादव, समाजवादी पार्टी

सरकार को और गृह मंत्री को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और बताना चाहिए कि ख़ामियाँ कहाँ हैं. अभी तक जो लोग मारे गए हैं या जो लोग गंभीर रूप से घायल हैं उनके लिए सरकार को आर्थिक सहायता की घोषणा करनी चाहिए जो कि परिवारों के लिए सांत्वना होगी.

जब भी आतंकवादी हमले होते हैं तो उसके बाद एक विशेष धर्म के लोगों को शक की दृष्टि से देखा जाता है जो कि बहुत ख़तरनाक है. हर आतंकवादी हमले के बाद ऐसा होता है जो कि ठीक नहीं है. इस पर बहस भी हो रही है.

शरद यादव, जनता दल यूनाइटेड

ये जितने हमले हो रहे हैं उसके बाद ये देश किसी क़ीमत पर घुटने नहीं टेकेगा बल्कि मुक़ाबला करेगा. हम तो जिस दिन से आज़ाद हुए उस दिन से ऐसी हर बात का मुक़ाबला करते आए हैं.

मैं सरकार की आलोचना नहीं करता मगर संसद में काफ़ी अनुभवी लोग रहते हैं तो उनके अनुभव का लाभ लिया जाना चाहिए और जनता तथा समाज के लोगों से इस मौक़े पर हमारा संवाद ज़रूर बनना चाहिए जो इस तरह की घटनाओं के बारे मे हमें ख़बर दे सकें.

वासुदेव आचार्य, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी

पूरा देश आतंकवाद से लड़ने में एकजुट खड़ा है. आतंकवादियों का कोई धर्म, मजहब नहीं है इसलिए एकजुट होकर इसका मुक़ाबला करना है क्योंकि आतंकवादी हमारे देश को अस्थिर करना चाहते हैं, बाँटना चाहते हैं.

हम उम्मीद करते हैं कि आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए हरसंभव क़दम उठाए जाएँगे. मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति हमारी संवेदना है और प्रार्थना है कि घायल जल्दी ही स्वास्थ्य लाभ करेंगे.

विजय कुमार मल्होत्रा, भारतीय जनता पार्टी

मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के थोड़े ही दिन बाद दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर हुए धमाके से ये साबित हो गया है कि सरकार ने मुंबई की घटना से कोई सबक नहीं लिया. ऐसी तमाम ख़बरें आ रही थीं कि दिल्ली चरमपंथियों के निशाने पर है लेकिन समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई. देश का ख़ुफ़िया तंत्र विफल रहा है.

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