रेड्डी की ज़मानत पर सुनवाई टली

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Image caption रेड्डी पर अवैध खनन के गंभीर आरोप हैं.

हैदराबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री और लोहे की खदानों के मालिक जनार्दन रेड्डी की ज़मानत की याचिका की सुनवाई को गुरूवार तक के लिए टाल दिया है.

रेड्डी को सीबीआई हिरासत में लिए जाने संबंधी सीबीआई की याचिका की सुनवाई भी टाल दी गई है.

रेड्डी के वकीलों ने उन्हें सीबीआई की हिरासत में देने का यह कह कर विरोध किया कि सीबीआई ने जो रिपोर्ट दाखिल की है वो अधूरी है.

दूसरी तरफ रेड्डी की ज़मानत की याचिका पर अदालत ने सीबीआई से कहा कि वो इस पर कल तक जवाब दे.

हालाँकि रेड्डी के वकीलों की फ़ौज उन्हें ज़मानत पर छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही है लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है की सीबीआई ने उन पर अवैध रूप से लोहे के खनन और उस के निर्यात सहित जो गंभीर आरोप लगाए हैं उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि उन्हें जल्दी ज़मानत मिलेगी.

जनार्दन रेड्डी और उनकी ओबलापुरम कंपनी के प्रबंद निदेशक श्रीनिवास रेड्डी को सीबीआई ने सोमवार को बेल्लारी से गिरफ्तार किया था और वो उस दिन से हैदराबाद की चंचलगुडा जेल में क़ैद हैं.

सीबीआई की अदालत ने इन दोनों को 19 सितम्बर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है लेकिन सीबीआई उनसे पूछ ताछ के लिए उन्हें दो सप्ताह की हिरासत में लेना चाहती है.

आम क़ैदियों जैसा बर्ताव

इन दोनों को जेल में आम कैदियों के साथ ही रखा गया है. जेल के मुख्य अधिकारी केशव नायडू ने बताया है कि इनके साथ कोई विशेष सुविधा नहीं मिली है.

पहली रात इन दोनों ने जेल के उसी "रिसेप्शन सेल" में ज़मीन पर सोकर गुज़री जहाँ नए क़ैदियों को रखा जाता है. दूसरे दिन उन्हें अलग कोठरी में ले जाया गया.

जहाँ तक भोजन का सवाल है. कल तक आलीशान बंगले में ऐश का जीवन बिताने वाले रेड्डी को वही दाल रोटी और चावल खाना पड़ रहा है जो दूसरे कैदियों को मिलता है.

जेल सूत्रों का कहना है कि इन दोनों को दूसरों के साथ लाइन में खड़े रहकर खाना लेना पड़ रहा है और फिर अपनी प्लेट भी धोकर रखना पड़ रहा है.

उन्हें ज़मीन पर बिछाकर सोने के लिए एक चादर दी गई है और ओढने के लिए एक कंबल. रेड्डी को क़ैदी नंबर 697 मिला है जब की उनके जीजा को 696 नंबर दिया गया है.

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Image caption कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सीमा पर भारी मात्रा में खनन हुआ है.

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि रेड्डी से अभी भी काफी जानकारी मिल सकती है.

पूछताछ

रेड्डी से सबसे अहम सवाल यही है कि उन्होंने जो लगभग 5000 करोड़ रुपये के कच्चे लोहे का खनन किया और उसका निर्यात किया उससे आया पैसा कहाँ गया? उसे किन कंपनियों में लगाया गया या उसे उसे विदेशों में ही रखा गया है?

सूत्रों के अनुसार अब तक सीबीआई उनसे जो कुछ पूछ सकी है उस में जनार्दन रेड्डी ने पूरा इल्ज़ाम अपने जीजा और कंपनी के प्रबंध निदेशक श्रीनिवास रेड्डी पर थोपने की कोशिश की है.

उन्होंने कहा कि वो ओबलापुरम कंपनी के रोज़मर्रा के कामों की जानकारी नहीं रखते और इस की देखरेख श्रीनिवास रेड्डी ही करते थे. लेकिन सीबीआई को जो दस्तावेज़ और रिकार्ड ज़ब्त किए है उससे स्पष्ट है कि रेड्डी को सब कुछ मालूम था.

सीबीआई का ध्यान इस बात पर केन्द्रित है कि किस तरह रेड्डी की कंपनी ने अनंतपुर जिले में एक जगह पर खनन की अनुमति लेने के बाद उसके आधार पर किसी और ही जगह पर लोहे का खनन किया और उस का निर्यात किया.

इस सन्दर्भ में पुलिस, खदान और जंगल विभाग के उन अधिकारियों की भूमिका की भी छान बीन कर रही है जो इस की जानकारी रखते थे लेकिन वो खनन को नहीं रोक सके.

सीबीआई ने यह पता लगाने के लिए कि रेड्डी की कंपनी ने कितने बड़े इलाके में कितनी खुदाई की और वहां से कितना कच्चा लोहा निकला, उपग्रह से चित्र प्राप्त किए हैं. छान बीन से यह भी पता चला है कि उन्हें अनंतपुर में जिस जगह खनन की अनुमति दी गई थी वहां कोई खनन नहीं किया गया क्योंकि वहां कच्चे लोहे की क्वालिटी अच्छी नहीं थी और उसी लाइसेंस की आड़ में उन्होंने दूसरी जगहों पर और विशेष रुप से कर्नाटक की सीमा में खुदाई की और कच्चे लोहे का खनन किया.

इधर तिरुपति में यह मांग जोर पकड़ गई रही है कि 2009 में जनार्दन रेड्डी और उन के पुत्र ने तिरुमाला मंदिर को जो 45 करोड़ रूपए का ताज भेंट किया था वो उनको ही वापस लौटा दिया जाए क्योंकि यह भ्रष्ट पैसे से तैयार किया गया था.

सोने और हीरों से बना यह ताज रेड्डी ने यह कहकर मंदिर को भेंट किया था कि वो भगवन को धन्यवाद देना चाहते हैं.

कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ताज वापस करने की मांग करते हुए तिरुपति में विरोध प्रदर्शन किया और रेड्डी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

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