विमान कर्ज़ पर लेना दुर्भाग्यपूर्ण :सीएजी

 गुरुवार, 8 सितंबर, 2011 को 17:25 IST तक के समाचार
एयर इंडिया

सीएजी ने एयर इंडिया पर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी है.

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी सीएजी ने एयर इंडिया की ख़राब हालत के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उसने विमानों की ख़रीद में करोड़ों रुपए ज़ाया कर दिए.

एयर इंडिया मामले पर सीएजी की ये रिपोर्ट गुरुवार को संसद में पेश कर दी गई.

सीएजी ने इस रिपोर्ट में कहा है कि एयर इंडिया ने कर्ज़ लेकर 111 विमान लेने का जो फ़ैसला किया था वह दुर्भाग्यपूर्ण था.

सीएजी ने इतने बड़ी तादाद में विमानों का लेना 'ख़तरनाक' बताया और कहा कि इन विमानों की ख़रीद की वजह से एयर इंडिया पर कर्ज़ का बोझ बढ़कर पिछले साल के मार्च महीने के अंत तक 38,423 करोड़ रुपए हो गया.

इसमें सीएजी ने एयर इंडिया और इंडियन एयलाइंस के विलय को ग़लत समय में किया गया फ़ैसला बताया और कहा कि विलय करने का जो वित्तीय आधार बनाया गया था वो भी विलय से पहले पूरी तरह प्रामाणिक नहीं था.

रिपोर्ट के मुताबिक़ नए विमानों की जो ख़रीद हुई वह पूरे तरह से कर्ज़ पर हुई और केवल इंडियन एयलाइंस के लिए सरकार की तरफ़ से 325 करोड़ रुपए की सहायता दी गई थी.

दुर्भाग्यपूर्ण

सीएजी का कहना था कि ऐसी शुरुआत के बाद इसे विफल होना ही था और इससे नागरिक उड्डयन मंत्रालय, सार्वजनिक निवेश बोर्ड और योजना आयोग को चौकन्ना हो जाना चाहिए था.

इस रिपोर्ट में एयर इंडिया से जुड़े कई और पहलुओं की भी चर्चा है जिनमें- विमानों की ख़रीद, विलय, कर्ज़ का बोझ और वैश्विक एयरलाइन समूह स्टार एलांयस के साथ जुड़ाव के साथ ही उसकी वित्तीय और ऑपरेशनल हालत शामिल है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विमानों की ख़रीद में ज़रुरत से ज़्यादा समय लगा. सीएजी का कहना था ख़रीद का पहला प्रस्ताव 1996 में बनाया गया था और इसकी जाँच-पड़ताल चलती रही. अंत में जनवरी 2004 में पहले 28 विमानों की ख़रीद का फ़ैसला लिया गया मगर अंत में 68 विमान ख़रीदे गए.

सीएजी ने कहा कि नई योजना के बाद विमानों को ख़रीदने की संख्या में नाटकीय बढ़ोत्तरी देखी गई और 2004 तक ऐसी ही गतिविधियां देखी गईं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये साफ़ तौर पर इस बात को प्रमाणित करता है कि विलय से पहले वाले एयर इंडिया ने अपनी पहली योजना को ज़ल्दबाज़ी में बदल दिया.

रिलायंस इंडस्ट्रीज़

इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और केयर्न इंडिया को आवंटित तेल एवं गैस परियोजनाओं के प्रदर्शन पर कैग की रिपोर्ट भी गुरुवार को पेश हुई है.

सीएजी ने पेट्रोलियम मंत्रालय से कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को पूरा केजी-डी 6 ब्लॉक रखने की मंजूरी के फ़ैसले की समीक्षा की जाए.

सीएजी ने 10 अनुबंधों की गहराई से समीक्षा करने की सिफ़ारिश की है. इसमें से आठ अनुबंध रिलायंस द्वारा केजी-डी 6 ब्लाक में अकेर समूह को दिए गए हैं.

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