बारिश से बेहाल हुई दिल्ली

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Image caption शुक्रवार की बारिश से दिल्ली में जगह जगह जाम लगे और लोग कई इलाकों में पानी घरों में घुस गया.

शुक्रवार का दिन दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्र के निवासियों के लिए भारी मुसीबत लेकर आया.

पूरे इलाक़े में सुबह से हो रही बारिश ने जनजीवन उथल-पुथल कर दिया.

हालांकि दोपहर होते-होते बारिश की रफ़्तार धीमी पड़ चुकी थी लेकिन इतने में ही दिल्ली का हाल बदहाल हो गया.

खुद की ही बात करूँ तो सुबह नौ बजे के बाद से ही मित्रों के फ़ोन आने शुरू हो गए,'भाई कुछ भी हो जाए अपनी कार लेकर ऑफ़िस जाने की गलती मत कर बैठना'.

ज़ाहिर है इसके तुरंत बाद मैंने घर पर टीवी खोला और तमाम न्यूज़ चैनलों पर जो मंज़र देखा उससे तो एकाएक 26 जुलाई 2005 की याद ताज़ा हो गई.

ये वो दिन था जब मुंबई में हुई मूसलाधार बारिश में कई लोगों की जान गई थी और मुंबई महानगरी की सड़कों पर नावें और मोटरबोट राहत और बचाव कार्य में जुटीं थी.

बहराल शुक्रवार को दिल्ली का हाल उतना बुरा तो नहीं था, लेकिन हाँ, तस्वीरों में हर जगह सड़कें बारिश के पानी से लबालब दिख रहीं थी और हजारों कारों की कतारें सड़कों पर जैसे थम सी गईं थी.

मौसम विभाग ने बताया कि सुबह चार बजे से लेकर दोपहर तक कुल 91.1 मिलीमीटर बारिश हुई है जो दिल्ली के लिए शायद अत्यधिक ही कही जाएगी.

सड़कों पर पेड़ों की टहनियां टूट कर बिखर गईं थी, रेड लाइटें काम नहीं कर रहीं थी और ऑफिस जाने वाले लाखों लोग घंटों जामों में फंसे रहे.

'कितने घंटे में पहुंचे?'

अपने सहयोगी पंकज प्रियदर्शी के साथ फ़ोन पर बात हुई तो तय हुआ कि आज तो मेट्रो के मज़े लिए जायें जिससे सड़कों पर ट्रैफ़िक से बचा जा सके.

आनन-फ़ानन में हम मेट्रो स्टेशन पहुंचे और खुशकिस्मत भी रहे कि सीट मिल गई.

पर उसके बाद जो हुआ वो कम से कम से कम मैंने तो न देखा न सुना.

आगे आने वाले हर मेट्रो स्टेशन पर सैंकड़ों लोग मेट्रो के दरवाज़े पर टिड्डों की तरह आकर चिपक जाते थे और हर किसी को दरकार थी सिर्फ़ खड़े होने की जगह की.

ट्रेन के भीतर तिल भर की जगह नहीं और लोगबाग बारिश को कोसते भीड़ कम होने का इंतज़ार करते रहे.

हमने भी अपने-अपने मोबाइल निकाले और ट्विटर पर ट्वीट करने में जुट गए. ट्विटर और फेसबुक भी ऐसे ही संदेशों से भरे हुए थे.

बहरहाल किसी तरह ऑफिस पहुंचे तो बीबीसी अंग्रेजी वेबसाईट पर काम करने वाले सहयोगी सौतिक बिस्वास का पहला सवाल था, "नितिन, कितने घंटे? अभी तक का रिकॉर्ड रेहान फ़ज़ल का है. उन्हें चार घंटे लगे हैं जाम से निकलकर ऑफिस पहुँचने में."

ऊपर वाले को धन्यवाद दिया और अपनी सीट पर विराजमान हुए तो पाया कि आज बहुत कम ही ख़ुशकिस्मत थे जो ऑफ़िस समय पर सही सलामत पहुंचे. अफ़सोस एक बात का ज़रूर हुआ.

दिल्ली की नरेला कॉलोनी में एक छोटी बच्ची की मौत इसी बारिश के चलते हो गई.

कुछ बच्चे स्कूल जा रहे थे जब एक सरकारी अस्पताल की इमारत का बाहरी हिस्सा ढह गया. ये बदकिस्मत बच्ची उन्ही में से एक थी.

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