छत्तीसगढ़: एस्सार कंपनी फिर विवादों में

बी के लाला
Image caption इससे पहसे भी एस्सार कंपनी पर माओवादियों को पैसे देने के आरोप लगे हैं.

माओवादियों को कथित रूप से पैसे पहुंचाने को लेकर छत्तीसगढ़ में खनन कर रही एस्सार कंपनी एक बार फिर विवादों में घिर गई है.

ताज़ा विवाद कंपनी के एक ठेकेदार और उसके सहयोगी की दंतेवाड़ा में गिरफ़्तारी के बाद खड़ा हुआ है.

छ्त्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि उसने बी के लाला नाम के एक ठेकेदार के पास से 15 लाख रूपए बरामद किए हैं जो वह माओवादियों को देने के लिए जा रहे थे.

पुलिस का कहना है कि अभी पता नहीं चल पाया है कि यह रक़म कंपनी की तरफ़ से थी या लाला ख़ुद इसे माओवादियों को देने के लिए जा रहे थे.

दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग का कहना है कि पूछ ताछ में लाला नें पुलिस को बताया है कि यह रक़म माओवादियों को दी जानी थी जो एस्सार कंपनी की थी.

लाला को पालनार इलाक़े के एक साप्ताहिक हाट से गिरफ़्तार किया गया जहां पर पुलिस नें लिंगाराम कोडोपी नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता को भी गिरफ़्तार किया है.

कोडोपी पालनार के ही रहने वाले हैं और उनके परिजनों का आरोप है कि उन्हें घर से गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस ने गिरफ़्तार लोगों के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम और राजद्रोह का मामला दर्ज किया है.

पिछले साल जुलाई महीने में पुलिस ने एक बयान जारी कर लिंगाराम कोडोपी पर माओवादी होने का आरोप लगाया था.

इस मामले ने काफ़ी तूल पकड़ा था जब कोडोपी ने दिल्ली में संवाददाता सम्मलेन कर ख़ुलासा किया था कि पुलिस ने उसे 40 दिनों तक ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से अपनी हिरासत में रखा था और उच्च न्यायलय के हस्तक्षेप के बाद उसे रिहा किया गया था.

विकिलीक्स

हाल ही में विकिलीक्स के ज़रिए जारी किए गए अमरीकी केबल्स में कहा गया था कि छत्तीसगढ़ में बिछाई गई अपनी पाइप लाइन को सही तरह से संचालित करने के लिए एस्सार कंपनी द्वारा माओवादियों को समय समय पर मोटी रक़म बतौर लेवी दी जाती है.

Image caption विकिलीक्स ने छत्तीसगढ़ में कई कंपनियों के ज़रिए माओवादियों को पैसे दिए जाने का दावा किया था.

विकिलीक्स का यह ख़ुलासा अगस्त महीने के अंत में जारी एक रिपोर्ट में किया गया था कि नक्सल प्रभावित इलाक़ों में काम कर रही कम्पनियां माओवादियों को लेवी के तौर पर मोटी रक़म देतीं हैं.

विकिलीक्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि मुंबई स्थित अमरीकी उच्च आयोग ने अपने देश के साथ हुए कूटनीतिक पत्राचार में कहा है कि एस्सार कंपनी के एक वरिष्ट अधिकारी ने बताया है कि वह छत्तीसगढ़ में खनन और इस्पात सम्बन्धी अपने प्रोजेक्ट के लिए "माओवादियों को एक अच्छी ख़ासी रक़म देते हैं ताकि नक्सली उनके काम में दख़ल ना दें और उनका उत्पादन निर्बाध्य रूप से चलता रहे."

सिर्फ़ इतना ही नहीं विकिलीक्स ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी ख़ुलासा किया था कि माओवादियों को फ़िलिपीनो विद्रोहियों और श्रीलंकाई तमिल विद्रोहियों (एलटीटीई) द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जाता रहा है.

इस ख़ुलासे के बाद छत्तीसगढ़ के आला पुलिस अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं.

वहीं छत्तीसगढ़ में एस्सार कंपनी के अधिकारी भी कुछ कहने से कतरा रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में एस्सार के प्रवक्ता शाहनवाज़ ने पहले तो यह कहा कि यहां पर कोई इस मामले में बयान देने के लिए अधिकृत नहीं है.

फिर उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी क़ानून का पालन करती है और माओवादियों को पैसे देने की बात बेबुनियाद है.

विशाखापट्नम में एस्सार स्टील की एक आठ मिलियन टन की इस्पात उत्पादन की इकाई स्थित है.

इस इकाई तक लोह अयस्क पहले ट्रकों से दंतेवाड़ा के रास्ते पहुंचाया जाता था.

इस दौरान माओवादियों ने कई बार ट्रकों को आग के हवाले कर दिया था.

फिर कंपनी ने विशाखापट्नम तक लगभग 280 किलोमीटर लम्बी एक पाइप लाइन बिछादी जिसके ज़रिए अब लोह अयस्क भेजा जाता है.

पिछले साल माओवादियों ने विस्फोट कर पाइप लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया था. यह पाइप लाइन घोर नक्सल प्रभावित इलाकों से होकर गुज़रती है.

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