'गुजरात के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं मोदी'

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Image caption नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सामुदायिक एकता बढ़ाने के लिए वो आगामी 17 सितंबर से तीन दिन का उपवास करेंगे.

गुजरात के निलंबत आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखते हुए कहा है कि उन्होंने और उनकी पार्टी ने हाल ही में सुनाए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मामले में ‘पूरी तरह अर्थ का अनर्थ किया है.’

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 2002 गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में हुए दंगों के मामले पर कोई आदेश देने से इनकार करते हुए कहा था कि अब इस पर फ़ैसला गुजरात की निचली अदालत सुनाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश उस याचिका पर सुनाया था जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 62 अन्य अधिकारियों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 2002 में हुए गुलबर्ग सोसाइटी दंगों को रोकने के लिए जान बूझ पर कोई क़दम नहीं उठाया और हिंसा को बढ़ावा दिया.

कौन हैं संजीव भट्ट

इस फैसले की व्याख्या करते हुए तीखे तेवरों के साथ आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसी भी सूरत में नरेन्द्र मोदी को क्लीन चिट नहीं देता और किसी मायने में यह नहीं कहता कि उनके खिलाफ़ ज़किया जाफ़री की शिकायत गैर-तथ्यात्मक है.

संजीव भट्ट ने लिखा है, ''भारतीय जनता पार्टी या उसके नेता नरेंद्र मोदी के प्रचार के विपरीत यह फैसला गुजरात दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण क़दम है.

भट्ट कहते हैं कि जिस फैसले पर मोदी और उनके साथ जुड़े लोग बेहद खुश हैं वह फैसला असल में असल में बेहद चालाकी के साथ दंगों के लिए ज़िमेमेदार लोगों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा करेगी.

गुजरात काडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी संजीव राजेंद्र भट्ट सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर करने के बाद सुर्ख़ियों में आ गए थे.

दिसंबर 1999 से सितंबर 2002 तक वे राज्य ख़ुफ़िया ब्यूरो में ख़ुफ़िया उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे और गुजरात के आंतरिक सुरक्षा से जुड़े सभी मामले उनके अधीन थे.

संजीव भट्ट का हलफ़नामा

अप्रैल 2011 को संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दायर कर कहा था कि 27 फ़रवरी 2002 को वो एक बैठक में शामिल थे जिसमें मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद पुलिस अफ़सरों से कहा था कि दंगाइयों को नज़रअंदाज़ करें. साथ ही दंगों का शिकार हो रहे लोगों की ओर से मिलने वाली शिकायतों को भी नज़रअंदाज़ करने का आदेश दिया गया था.

संजीव भट्ट की ओर से यह पत्र उस वक्त आया है जब एक दिन पहले नरेंद्र मोदी ने आम नागरिकों को लिखे एक सार्वजिनक पत्र में कहा था कि गुजरात दंगों को लेकर उनका नाम बदनाम करने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने क़रारा जवाब दिया है.

नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गुजरात में सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने के लिए वो आगामी 17 सितंबर से तीन दिन का उपवास करेंगे.

इसके जवाब में संजीव भट्ट ने लिखा है,''छह करोड़ गुजरातियों में से मैं भी एक हूं और मैं तब खुद को बेहद ठगा हुआ महसूस करता हूं जब आप जैसे लोग अपने निहित स्वार्थों के लिए गुजरात के लोगों को बहकाने का काम करते हैं.''

मोदी पर पलट वार करते हुए संजीव भट्ट ने लिखा है कि सदभावना, सच्चाई और न्याय के बिना अधूरी है और इसे कोई मांग या खरीद नहीं सकता. वो कहते हैं कि इस बाबत लोगों का विश्वास जीतना अब मोदी के लिए मुश्किलों से भरा है.

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