वो मदद के लिए चिल्लाता रहा....

Image caption सिक्किम में भूकंप के झटके आधी रात को भी महसूस किए गए.

18 सितंबर की शाम गैंगटॉक में एक आम रविवार की तरह थी, जब लोग परिवार और दोस्तों के साथ शॉपिंग या मौज-मस्ती के लिए निकलते हैं. वहीं कुछ लोग घर पर ही रह कर शाम की चाय के साथ बारिश का लुत्फ़ उठा रहे थे.

लेकिन शाम 6.11 बजे के आसपास एक तगड़े झटके ने एक सुस्त शाम को डरावनी शाम में बदल कर रख दिया.

डीकी युथेंग्पा अपने घर की ओर ड्राइव कर रही थीं, जब भूकंप ने सिक्किम को झंझोड़ा. लोगों के बीच मची अफ़रा-तफ़री के बीच उन्होंने देखा कि एक टैक्सी ड्राइवर को डर के मारे दिल का दौरा पड़ गया था, लेकिन वे उनकी मदद के लिए कुछ नहीं कर पाईं.

बीती शाम का माहौल याद करते हुए डीकी ने बताया, "शायद उस टैक्सी ड्राइवर को डर के मारे ही दिल का दौरा पड़ा. वो मदद के लिए चिल्ला रहा था, लेकिन मैं उसकी मदद के लिए कुछ न कर पाई. ज़ाहिर है कि सभी को अपनी जान की परवाह थी. ऐसे में हम उसकी मदद कैसे कर पाते? मेरे परिजन मेरी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थे. मैं भी इतनी घबराई हुई थी कि बस जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहती थी."

डीकी जैसे ही घर पहुंची तो पाया कि उनके घर के बड़े से आंगन में पूरी कॉलोनी के लोग इकट्ठा हो गए थे क्योंकि उनका ही एकमात्र घर ऐसा था जिसमें घर के आगे थोड़ा खुली जगह रखी गई है.

दरअसल गैंगटॉक में छोटी-छोटी तंग गलियों के दोनों तरफ़ बहुमंज़िला घर बने हुए हैं. भूकंप से कई घरों में दरारें आ गई थी और लोगों को जहां खुली जगह दिखी, वे वहां की ओर दौड़ पड़े.

इमारतें खिलौनों की तरह हिली

गैंगटॉक में टूरिस्ट गाइड मृणाल राना ने बीबीसी को बताया कि गैंगटॉक की सबसे पसंदीदा जगह महात्मा गांधी मार्ग पर उस वक़्त सैंकड़ों लोग मौजूद थे और भूकंप आते ही पूरे बाज़ार में खलबली मच गई.

मृणाल ने बताया, "भूकंप के बाद स्थानीय पुलिस ने वहां मौजूद लोगों के लिए शांत रहने की घोषणा की जिसकी वजह से स्थिति को क़ाबू में लाया जा सका. मेरे कार्यालय के पास एक अस्पताल है और मैंने सोचा कि मुझे वहां मौजूद मरीज़ो को जल्द से जल्द वहां से बाहर निकाल किसी सुरक्षित जगह पर ले आना चाहिए. लेकिन जैसे ही मैं वहां पहुंचा तो मेरी आंखों से आंसू निकल आए. बच्चे और बूढ़े बेहद डरे हुए थे. लोगों को पास में मौजूद फ़ुटबॉल स्टेडियम में ले जाया गया जहां उन्हें पूरी रात काटनी पड़ी.”

सिक्किम को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 31 भूकंप के बाद हुए भूस्खलन की वजह से बंद हो गया, जिसकी वजह से सिक्किम में फंसे पर्यटकों का भी वहां से निकलना मुश्किल हो गया है.

‘प्लान बदल सकते हैं, प्रकृति नहीं’

ब्रिटेन से अपनी पत्नी के साथ सिक्किम घूमने आए माइकल जॉन उस वक्त अपने होटल के कमरे में चैन की नींद सो रहे थे, जब उन्होंने कुछ खड़खड़ाने की आवाज़ें सुनी.

उन्होंने अपने भयावह अनुभव को बयान करते हुए कहा, “रविवार की शाम मैंने अपनी ज़िदगी में पहली बार भूकंप के झटके महसूस किए. भूकंप काफ़ी प्रबल था और कमरे में मौजूद बेड, सोफ़ा और टेबल ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगे. हम कमरों से बाहर निकले और होटल के मैदान में आ कर खड़े हो गए. लोग काफ़ी डरे हुए लग रहे थे, लेकिन भगवान का शुक्र है कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.”

जब मैंने माइकल से पूछा कि क्या उन्हें इस बात पर पछतावा है कि उन्होंने सिक्किम को अपनी छुट्टियां बिताने के लिए चुना तो उनका कहना था, “बिलकुल नहीं. हम अपनी योजनाओं में बदलाव कर सकते हैं, लेकिन प्रकृति में होने वाले बदलाव हमारे बस में कतई नहीं है. सिक्किम ख़ूबसूरत जगह है और मुझे यहां आने का कोई दुख नहीं.”

फ़िलहाल सिक्किम में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और रविवार शाम से ही बिजली गुल है. दूसरी ओर मोबाइल नेटवर्क ख़राब होने के कारण लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं.

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